Justice Delayed, Freedom Denied! MP की महिला को हाईकोर्ट से मिली थी राहत, लेकिन गरीबी बन गई जेल की जंजीर! 5.5 साल तक बेल के बावजूद सलाखों के पीछे रही महिला…अब कोर्ट ने कहा-“यह दुर्लभतम मामला है”, 10,000 के मुचलके पर हुई रिहाई।

MP High Court Rare Bail Case: मध्यप्रदेश में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने न्याय व्यवस्था, गरीबी और प्रशासनिक लापरवाही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक महिला, जिसे हाईकोर्ट ने 2020 में ही राहत दे दी थी, वह बेल मिलने के बावजूद 5.5 साल तक जेल में सड़ती रही। कारण-गरीबी, जानकारी की कमी और कानूनी सहायताओं का अभाव।

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कोर्ट ने कहा-"दुर्लभतम मामला", रिहाई के आदेश 

जस्टिस अतुल श्रीधरन की बेंच ने महिला की स्थिति को दुर्लभ और अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। कोर्ट ने कहा कि 2020 में उसकी सजा को सस्पेंड कर दिया गया था और उसे ज़मानत भी दे दी गई थी। लेकिन सिर्फ 10,000 रुपये के निजी मुचलके पर रिहा होने के बावजूद, महिला जेल में बंद रही क्योंकि वह इतनी भी सक्षम नहीं थी कि वह ये शर्त पूरी कर सके।

सिस्टम का क्रूर चेहरा: न्याय की कीमत क्या है? 

इस मामले ने सिस्टम की उस खामोश क्रूरता को उजागर किया है जो गरीब, असहाय और अनपढ़ आरोपियों के साथ होता है। कोर्ट के आदेश पर महिला के वकील ने याचिका दायर की और आखिरकार हाईकोर्ट ने उसे रिहा करने का आदेश जारी किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला को कानूनी सहायता नहीं मिली, न ही उसकी ओर से किसी ने याचिका डाली। यह दिखाता है कि सिस्टम में 'बेल' मिलना भी कई बार किसी गरीब के लिए पर्याप्त नहीं होता।

क्या कहते हैं आंकड़े? 

भारत में हजारों ऐसे विचाराधीन कैदी हैं जिन्हें जमानत मिलने के बावजूद कानूनी जानकारी, संसाधनों और आर्थिक स्थिति के चलते जेल में रहना पड़ता है। इस केस ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा किया है-क्या हमारे जेलों में इंसाफ, पैसे से चलता है?

क्या न्याय सबके लिए बराबर है? 

यह घटना केवल एक महिला की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की कहानी है जो गरीब और पढ़े-लिखे न होने की सजा वर्षों तक देती है। कोर्ट ने महिला को तत्काल रिहा करने का आदेश देते हुए कहा-“ऐसा केस पहले कभी नहीं देखा गया”।