मध्यप्रदेश में ड्रग्स नेटवर्क खत्म करने के लिए 3 साल का अभियान चलेगा। 446 करोड़ की संपत्ति अटैच, 18 गुप्त लैब ध्वस्त और कॉलेजों में एंटी ड्रग समितियां बनेंगी।
भोपाल। मध्यप्रदेश में अवैध मादक पदार्थों के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार अब तीन साल का विशेष अभियान चलाने की तैयारी में है। इसके तहत ड्रग्स की तस्करी करने वाले नेटवर्क को तोड़ने, नशे से जुड़े अपराधियों की संपत्ति जब्त करने और शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों को नशे से दूर रखने पर विशेष जोर दिया जाएगा। 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी ड्रग समितियां गठित की जाएंगी। इनमें शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी, उच्च शिक्षा विभाग, सामाजिक न्याय विभाग और पुलिस के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने मंत्रालय में आयोजित पांचवीं राज्य स्तरीय एनसीओआरडी बैठक में संबंधित विभागों को इस दिशा में ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रदेश में नक्सलवाद को खत्म करने के लिए प्रयास किए गए, उसी गंभीरता से अवैध मादक पदार्थों के पूरे नेटवर्क को समाप्त करने के लिए काम करना होगा।
MP Drug Crackdown: तीन साल में ड्रग्स का पूरा नेटवर्क खत्म करने का लक्ष्य
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश को मादक पदार्थों से मुक्त बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर अभियान चलाना होगा। इसका संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से तीन साल के विशेष अभियान के लिए अपने-अपने विभागों के लक्ष्य निर्धारित करने और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
बैठक में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, विभागाध्यक्ष और नार्कोटिक्स व पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्य सचिव ने ड्रग्स के अवैध कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए सूचना तंत्र मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने नार्कोटिक्स वर्टिकल, एसआईबी और स्थानीय पुलिस के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के निर्देश भी दिए, ताकि तस्करी से जुड़े नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
Drug Seizure in MP: दो साल में 2.74 लाख किलो से ज्यादा मादक पदार्थ नष्ट
बैठक में बताया गया कि मादक पदार्थों के विनिष्टीकरण के मामले में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है। इस उपलब्धि पर मुख्य सचिव ने संतोष जताया। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में अफीम, मॉर्फीन, कोडीन सहित अन्य मादक पदार्थों से जुड़े 2,073 प्रकरणों में कुल 1,44,025 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए गए। वहीं, वर्ष 2026 में 30 सितंबर तक 2,756 प्रकरणों में 1,30,380 किलोग्राम मादक पदार्थों का विनिष्टीकरण किया गया।
इस तरह इन दोनों अवधियों में कुल 2,74,405 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए गए। इसके अलावा, ड्रग नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई के तहत 30 सितंबर 2026 तक एनडीपीएस एक्ट के 2,986 मामलों में 4,091 आरोपियों से 50,933 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गए। बैठक में बताया गया कि संबंधित विभागों ने आपसी समन्वय के साथ ये कार्रवाई की हैं।
Anti Drug Committee: कॉलेजों में बनेंगी एंटी ड्रग समितियां, विद्यार्थियों की पहचान रहेगी गोपनीय
राज्य सरकार अब नशे के खिलाफ लड़ाई में शिक्षण संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने जा रही है। मुख्य सचिव ने सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में नशामुक्त विद्यालय अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी ड्रग समितियां बनाई जाएंगी। इन समितियों में शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी, उच्च शिक्षा विभाग, सामाजिक न्याय विभाग और पुलिस के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
समितियों का नोडल अधिकारी संबंधित स्थानीय पुलिस थाने का बीट इंचार्ज होगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना और संस्थानों के आसपास मादक पदार्थों की गतिविधियों पर नजर रखना है। मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिया कि ऐसा सूचना तंत्र विकसित किया जाए, जिसमें ड्रग्स से जुड़ी जानकारी देने वाले विद्यार्थी, शिक्षक या अन्य व्यक्तियों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जा सके। इससे लोग बिना किसी डर के संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी साझा कर सकेंगे।
Drug Helpline 1933: नशे के कारोबार की सूचना देने के लिए होगा प्रचार
मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार की जानकारी जुटाने के लिए केंद्र सरकार की नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की हेल्पलाइन और मानस पोर्टल 1933 का इस्तेमाल किया जा रहा है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025 और 2026 के दौरान प्रदेश में कुल 811 शिकायतें प्राप्त हुईं। मुख्य सचिव ने नार्कोटिक्स विभाग की हेल्पलाइन 1933 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा, ताकि अधिक से अधिक लोग नशे से जुड़े अवैध कारोबार की सूचना दे सकें। उन्होंने सूचना देने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोत्साहन राशि बढ़ाने और जब्त संपत्ति से संबंधित निक्षेप के अधिकारों को राज्य स्तर से जिला स्तर तक विकेंद्रित करने के निर्देश भी दिए।
MP Drug Lab Action: प्रदेश में 18 गुप्त ड्रग्स प्रयोगशालाएं ध्वस्त
अवैध मादक पदार्थों के निर्माण पर कार्रवाई के तहत मध्यप्रदेश में 18 गुप्त प्रयोगशालाओं को ध्वस्त किया गया है। बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025-2026 के दौरान मध्यप्रदेश पुलिस, नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नार्कोटिक्स (CBN) ने संयुक्त रूप से ये कार्रवाई की। अवैध प्रयोगशालाओं को नष्ट करना ड्रग्स के निर्माण और आपूर्ति के नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। सरकार अब तस्करी के साथ-साथ उन स्रोतों पर भी कार्रवाई करना चाहती है, जहां मादक पदार्थ तैयार किए जाते हैं।
NDPS Act: ड्रग्स कारोबारियों की 446 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच
मध्यप्रदेश में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई भी तेज की गई है। बैठक में बताया गया कि एनडीपीएस एक्ट के तहत वर्ष 2025 में 54 मामलों में करीब 300 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई। वर्ष 2026 में 30 सितंबर तक 38 मामलों में 146 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच करने की कार्रवाई हुई। इस तरह दोनों वर्षों में कुल 92 मामलों में 446 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई है।
इसके अलावा, सितंबर 2026 तक एनडीपीएस के 201 विशेष ट्रायल मामलों को निगरानी में लिया गया। इसी अवधि में अदालतों में लंबित मामलों में से आठ मामलों में दोषसिद्धि हुई। सरकार की रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा ड्रग्स के कारोबार से अर्जित संपत्ति पर कार्रवाई करना भी है, ताकि अवैध कारोबार से जुड़े लोगों पर आर्थिक दबाव बनाया जा सके।
Codeine Cough Syrup: कोडीन कफ सिरप की सप्लाई और वितरण पर रहेगी नजर
बैठक में कोडीन आधारित कफ सिरप जैसी दवाओं के दुरुपयोग और अवैध वितरण को रोकने पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर ऐसी दवाओं के उत्पादन और प्रदेश में वितरण नेटवर्क की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए।
उन्होंने दवाओं की आपूर्ति और वितरण की लगातार जांच करने के साथ लाइसेंस प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और एकीकृत बनाने पर जोर दिया। इसके साथ ही प्रदेश में संचालित केमिकल फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर रसायनों के अवैध इस्तेमाल और डायवर्जन को रोकने के लिए उद्योग, श्रम, स्वास्थ्य और गृह विभाग को संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।
अधिकारियों को औद्योगिक क्लस्टरों और एसोसिएशनों की सूची आपस में साझा करने, निगरानी तंत्र विकसित करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने एफएसएल को भेजे जाने वाले एनडीपीएस मामलों के नमूनों की जांच रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर प्राप्त करने के लिए भी कार्ययोजना बनाने को कहा, ताकि मामलों की जांच और कानूनी कार्रवाई में अनावश्यक देरी न हो।
MP De-Addiction Centres: सभी जिलों में नशामुक्ति केंद्र खोलने की तैयारी
नशे की रोकथाम के साथ-साथ नशे की लत से जूझ रहे लोगों के उपचार और पुनर्वास पर भी सरकार ध्यान दे रही है। मुख्य सचिव ने सामाजिक न्याय विभाग को निर्देश दिए कि जिन जिलों में नशामुक्ति केंद्र नहीं हैं, वहां 31 अक्टूबर तक प्रस्ताव प्राप्त किए जाएं। लक्ष्य यह है कि प्रदेश के सभी जिलों में नशामुक्ति केंद्र स्थापित किए जा सकें।
बैठक में जानकारी दी गई कि वर्तमान में सामाजिक न्याय विभाग के 31 और स्वास्थ्य विभाग के 10 नशामुक्ति केंद्र संचालित हैं। इसके अलावा, सामाजिक न्याय विभाग की ओर से घोषित नशामुक्त क्षेत्रों की जानकारी संबंधित जिलों के कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों के साथ साझा करने को कहा गया, ताकि इन क्षेत्रों में नशे की रोकथाम के प्रयासों को प्रभावी बनाया जा सके।
Drug Awareness Campaign: 2.58 करोड़ लोगों तक पहुंचा नशामुक्ति का संदेश
मध्यप्रदेश में नशे के खिलाफ जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। बैठक में बताया गया कि मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहने के लिए प्रदेश में 30,339 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें करीब 2.58 करोड़ लोगों की भागीदारी रही। 'नशे से दूरी है जरूरी' अभियान को भी समाज के विभिन्न वर्गों का समर्थन मिला है। सोशल मीडिया के माध्यम से इस अभियान को 58 करोड़ से अधिक व्यूज प्राप्त हुए।
युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए उन्हें खेल गतिविधियों से जोड़ने की पहल भी की गई। इसके तहत करीब 10 हजार युवाओं को विभिन्न खेल गतिविधियों में शामिल किया गया। सरकार का जोर अब जागरूकता, पुलिस कार्रवाई, आर्थिक दंड, बेहतर जांच व्यवस्था और नशामुक्ति सेवाओं को एक साथ आगे बढ़ाने पर है। तीन साल के विशेष अभियान के जरिए प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों के नेटवर्क को खत्म करने और नशे के खिलाफ सामाजिक भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।







