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Raja Raghuvanshi Case: राज और राजा के जरिए क्या हासिल करना चाहती थी सोनम? सुनकर चौंक जाएंगे आप
Raja Raghuvanshi case: राजा से शादी सिर्फ दिखावा थी, असली खेल था राज के ज़रिए अपने रास्ते से हर रुकावट हटाना। सोनम ने दोनों को मोहरे की तरह इस्तेमाल किया—एक से शादी, दूसरे से साजिश…और बिछा दी वो चाल जिसने 6 मांओं की ममता, उम्मीदें और सपने छीन लीं।

परिवार की जिद से शुरू हुई पांच महीने की मोहब्बत
Sonam Raghuvanshi love story: सोनम रघुवंशी की उम्र 26 साल हो चुकी थी और परिवार पर शादी का दबाव बढ़ता जा रहा था। खुद के सपनों और आज़ादी की सोच रखने वाली सोनम इस शादी से खुश नहीं थी। इसी दौरान उसने अपनी ही फर्म में काम करने वाले पांच साल छोटे राज कुशवाहा को प्रेमी बना लिया — शायद सिर्फ इसीलिए कि वह सोनम की बातों से विरोध नहीं करता था।
'जो मेरी मर्जी ना माने, वो ज़िंदा नहीं रहेगा' — सोनम की सोच
राजा से सगाई के बाद सोनम ने मां से कहा था — "अब तुम अपनी मर्जी कर लो, फिर देखना मैं क्या करती हूं।" यह बात सोनम की उस कंट्रोलिंग पर्सनालिटी की तरफ इशारा करती है, जो अपनी मर्जी के खिलाफ कोई बात सहन नहीं कर सकती थी।
राज के इश्क में क्यों और कैसे पड़ी सोनम?
राज, जो परिवार की गाड़ियों से लेकर सोनम की जरूरतों तक हर चीज़ में हाज़िर रहता था — वह सोनम की नज़र में परफेक्ट था। उसे राजा जैसा "independent" नहीं बल्कि राज जैसा "obedient" पार्टनर चाहिए था। राजा से शादी उसकी मां की पसंद थी, लेकिन सोनम को उससे नफ़रत हो चुकी थी — और यही नफ़रत धीरे-धीरे हत्या की प्लानिंग में बदल गई।
सोनम का राज से क्या सिर्फ प्रेम था या फिर....
सोनम अपने भाई के साथ बिजनेस में एक्टिव थी। वह चाहती थी कि शादी के बाद भी वो कंट्रोल में रहे — लेकिन राजा से शादी होने पर यह संभव नहीं था। राज के साथ शादी करने से व्यवसाय भी हाथ में रहता और आज़ादी भी। लेकिन बीच में आ गया राजा… जिसे हटाना पड़ा।
सोनम है "एंटीसोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर" की शिकार?
गिरफ्तारी के बाद पछतावा नहीं, बल्कि सात घंटे की चैन की नींद लेने वाली सोनम को लेकर विशेषज्ञों ने बड़ा दावा किया —"वह क्लस्टर बी कैटेगरी की एंटीसोशल पर्सनालिटी की शिकार है। ऐसे लोग दूसरों की भावनाओं की कद्र नहीं करते और जिद पूरी करने किसी भी हद तक जा सकते हैं।"
राज कुशवाहा नहीं था इश्क़ – भाई जैसा रिश्ता था?
सोनम के भाई गोविंद ने चौंकाने वाला बयान दिया – “राज तो राखी बांधता था, मोबाइल में दीदी के नाम से सेव था।” तो सवाल ये है – क्या प्रेम सिर्फ एक मुखौटा था? या कोई पुराना तनाव, पारिवारिक दबाव और नियंत्रण खोने की घबराहट ने सोनम को हिंसक बना दिया?
‘जो मेरी नहीं सुनेगा, वो नहीं रहेगा’ – सोनम की सोच
सोनम को राज जैसा दबा हुआ जीवनसाथी चाहिए था, जो उसकी हर बात माने। राजा से शादी तय होते ही उसने मां से कहा –"अब तुम अपनी मर्जी कर लो, फिर देखो मैं क्या करती हूं।"
सामाजिक गुस्सा और मांओं का दर्द
शिलॉंग कोर्ट के बाहर सैकड़ों ग्रामीणों ने शांति मार्च निकाला और सख्त सजा की मांग की—यह हत्या पूरे राज्य में विरोध की आग भड़का रही है । राज की मौत ने 6 मांओं पर गहरा असर छोड़ा—एक बेटे की बुढ़ापे में लगाई जा रही आस, चार परिवारों की नई पीढ़ी डाली गई उम्रकैद की संभावना से प्रभावित। समाज चाह रहा है तेज़ और न्यायपूर्ण फैसला।
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