Sehore Ganesh Temple Case: सीहोर के गणेश मंदिर में एक आदमी ने पुजारी और उनके बेटे को धमकाने की कोशिश की थी, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही कई धाराओं के आधार पर मामला दर्ज हो चुका है।

Sehore Chintaman Ganesh Temple: सीहोर के चिंतामन गणेश मंदिर से एक हैरान कर देने वाला मामला हाल ही में सामने आया था, जिसमें एक शख्स हथियार लेकर मंदिर में पहुंचा, फिर मंदिर के पुजारी के बेटे और एक सेवादार को धमकाने लगा था। आरोपी ने आरोपी पिता-बेटे को जान से मारने की धमकी तक दी थी, जिसके बाद पुलिस एक्शन मोड़ में नजर आईं। आरोपी महेश यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ मामला दर्ज भी दर्ज हो गया है।

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दरअसल शनिवार दोपहर के वक्त महेश यादव नाम का एक आदमी मंदिर के पुजारी जय देबु और मंदिर के सेवादार लोकेश सोनी के साथ धक्का-मुक्की करने लगा। उस वक्त आदमी के हाथ में बका हथियार भी मौजूद था। हथियार दिखाकर महेश यादव कहता हुआ नजर आया कि 24 घंटे के अंदर पैसे नहीं मिले तो बड़ा हमला करूंगा। मंदिर के पुजारी ने पूरा वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। आरोपी महेश यादव के खिलाफ मंडी थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

आरोपी महेश यादव की गिरफ्तार पर सीहोर सीएसपी अभिनंदना शर्मा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि पुजारी के आवेदन पर पुलिस ने आरोपी महेश यादव के खिलाफ आईपीसी की धारा 296, 351(2) और आर्म्स एक्ट की धारा 25 के अंतर्गत केस दर्ज कर लिया गया है। आगे मामले की कार्रवाई फिलहाल जारी है। अब सबसे बड़ा सवाल सीहोर में मौजूद प्राचीन गणेश मंदिर की सुरक्षा पर उठता हुआ नजर आ रहा है। यहां पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं। जब आरोपी महेश यादव ने पुजारियों के साथ इस तरह की हरकत की उस वक्त उनके साथ कोई पुलिसकर्मी मौजूद क्यों नहीं था। साथ ही किसी भी तरह की पुलिस व्यवस्था भी नजर नहीं आई।

क्या है चिंतामन गणेश मंदिर का इतिहास?

2000 साल पहले उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने इस गणेश मंदिर की स्थापना की थी। इस मंदिर का नाम उन्होंने चिंतामन सिद्धि गणेश मंदिर रखा था। उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के सपने में भगवान गणेश एक बार आते थे और उन्होंने कहा था कि मेरे दर्शन करने के लिए इतनी दूर रणथंबोर जाते हो। मैं तुम्हें पुष्प के रूप में पार्वती नदी के कहारी पर मिलूंगा। राजा रात के वक्त ही उस फूल को लेने के लिए निकल गए। जैसे ही वो फूल लेकर वापस लौटने लगे तो एक भविष्यवाणी हुई कि राजा रात में तुम इस फूल को जहां तक ले जाना चाहते हो ले जाओ, लेकिन सुबह होते ही ये आगे नहीं बढ़ेगा। कुछ वक्त के बाद जब सुबह हुई तो रथ के पहिए जमी में ही धंस गए और पुष्प भगवान गणेश जी की प्रतिमा में बदल गया और जमीन पर स्थापित हो गया।