Who is World Cup winner Kranti Gond : भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने रविवार की रात नवी मुंबई के डी वाई पाटिल स्टेडियम में वर्ल्ड कप ट्राफी जीतने वाली भारत की इन बेटियों की पूरे देशभर में जय-जयकार हो रही है।

Women’s World Cup 2025 : वर्ल्ड कप विनर इंडियन वुमन्स क्रिकेट टीम खिलाड़ियों की भारत ही नहीं दुनिया भर में जय-जयकार हो रही है। भारत की इन बेटियों रविवार को डीवाई पाटिल स्टेडियम में विश्व कप ट्राफी जीतकर इतिहास रच दिया। हर खिलाडी को बीसीसीआई से लेकर राज्य सरकारें तक पैसों की बरसात कर रही हैं। वहीं भारतीय महिला क्रिकेट टीम की तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ को मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने बड़ा ऐलान किया।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किया बड़ा ऐलान

वर्ल्ड कप में अपनी शानदार गेंदबाजी और बेहतर प्रदर्शन का लोहा मनवा चुकीं विमेंस वर्ल्ड कप विनर क्रांति गौड़ महिला को एमपी सरकार एक करोड़ रुपए देगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को इसकी घोषणा की। सीएम ने ऐलान करते हुए कहा- में मध्यप्रदेश की बेटी एवं प्रतिभावान खिलाड़ी सुश्री क्रांति गौड़ को मध्यप्रदेश सरकार की ओर से ₹1 करोड़ दिया जाएगा। उन्होंने भारतीय महिला टीम को बधाई देते हुए कहा-बेटियों ने भारत का परचम लहरा दिया।आईसीसी महिला विश्व कप-2025 भारत के नाम कर मां भारती को गौरवान्वित करने वाली इन खिलाड़ियों को बधाई एवं हार्दिक अभिनंदन। यह विजय 'नए भारत' की नारी शक्ति की नई उड़ान है।

कौन हैं वर्ल्ड कप चैम्पियन क्रांति गौंड

क्रांति गौड़ महिला क्रिकेट टीम में गेंदबाज हैं। जो कि मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के घुवारा गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता मुन्ना सिंह पुलिस विभाग में प्रधान आरक्षक हैं। लेकिन वह एक केस को लेकर साल 2011 से सस्पेंड चल रहे हैं। आज भी क्रांति का खुद का एक पक्का मकान नहीं है। उनका परिवार दो कमरों वाले पुलिस क्वार्टर में रहता है। वह 5 भाई-बहनें में सबसे छोटी हैं। 

क्रांति गौड़ की संघर्ष भरी कहानी

क्रांति गौड़ को आज भले ही लोग विश्व विजेता के तौर पर जान रहे हैं। लेकिन यहा तक पहुंचन के लिए उन्होंने कड़ा संघर्ष किया है। उन्होंने अपने घर के सामने के मैदान में लड़कों के साथ क्रिकेट खेलती थीं। इस दौरान लोगों ने उन पर ताने भी मारे, लेकिन सभी को नजर अंदाज करते हुए वह आज मुकाम तक पहुंच गई हैं। क्रिकेट के लिए उनकी दीवानगी इस कदर थी कि उन्होंने इसकी खातिर पढ़ाई तक छोड़ दी। वह महज आठवीं तक पढ़ी हैं।