Frozen Semen Case: कैंसर से मृत बेटे के सीमेन को सुरक्षित रखने की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रजनन केंद्र को अंतरिम आदेश दिया है। मां चाहती हैं परिवार की वंश परंपरा आगे बढ़े। जानिए Assisted Reproductive Technology Act से जुड़ी कानूनी पेचिदगियां।

Frozen Semen Case: बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने एक अनूठे और संवेदनशील मामले में अंतरिम आदेश जारी करते हुए मुंबई स्थित एक प्रजनन केंद्र (Fertility Centre) को निर्देश दिया है कि वह एक मृत युवक के फ्रोज़न सीमेन (Frozen Semen) को सुरक्षित रखे। यह आदेश युवक की मां द्वारा दायर याचिका पर दिया गया, जो अपने बेटे की मृत्यु के बाद वंश को आगे बढ़ाने की इच्छा रखती हैं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई 2025 के लिए निर्धारित की है। तब तक के लिए युवक का सीमेन प्रिजर्व किया जाएगा।

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क्या है पूरा मामला?

युवक की मां ने कोर्ट में याचिका दाखिल की कि उनके बेटे ने कीमोथेरेपी (Chemotherapy) के दौरान अपना सीमेन फ्रीज कराया था। लेकिन उसने अपने मृत्यु के बाद सीमेन नष्ट करने की सहमति दी थी। मां का कहना है कि यह निर्णय बेटे ने परिवार से परामर्श किए बिना लिया। बेटे की मृत्यु फरवरी 2024 में हुई, वह अविवाहित था।

मां ने प्रजनन केंद्र से अनुरोध किया कि सीमेन के सैंपल को गुजरात स्थित एक IVF केंद्र में ट्रांसफर करने की अनुमति दी जाए लेकिन प्रजनन केंद्र ने यह कहते हुए मना कर दिया कि इसके लिए अदालत से अनुमति आवश्यक है, विशेष रूप से Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021 के प्रावधानों के तहत।

कोर्ट का रुख और अंतरिम राहत

जस्टिस मनीष पिटले (Justice Manish Pitale) की सिंगल बेंच ने 25 जून को सुनवाई के दौरान कहा कि अगर याचिका लंबित रहने के दौरान सीमेन सैंपल नष्ट हो जाता है तो याचिका का मकसद ही समाप्त हो जाएगा। कोर्ट ने कहा कि अंतरिम राहत के रूप में, प्रजनन केंद्र को आदेश दिया जाता है कि वह याचिका लंबित रहने तक सीमेन सैंपल को सुरक्षित और संरक्षित रखे।

कानूनी सवाल और ART कानून का दायरा

कोर्ट ने यह भी माना कि यह मामला Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021 के तहत महत्वपूर्ण कानूनी सवाल खड़ा करता है। विशेष रूप से यह कि मृत व्यक्ति के सीमेन का भविष्य क्या होगा और परिवार को इसमें क्या अधिकार मिल सकते हैं।

यह अधिनियम भारत में ART सेवाओं को विनियमित और नैतिक मानकों के अनुसार संचालित करने के लिए 2021 में लाया गया था। इसका उद्देश्य क्लीनिकों की जवाबदेही तय करना, दुरुपयोग रोकना और हितधारकों के अधिकारों की रक्षा करना है।