इस गांव ने गालियों को कहा अलविदा! क्या है इस अनोखे फैसले के पीछे का राज
महाराष्ट्र के एक गाँव ने गालियों पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है! जानिए, इस अनोखे फैसले के पीछे की वजह और नियम तोड़ने पर क्या है सजा।

‘नोरू मंचिदइते ऊरू मंचिदि अवुतुन्द’ इस कहावत को गाँव वाले दिल से मानते हैं। इसलिए सभी के बोलचाल पर नियंत्रण रखने के लिए उन्होंने मिलकर एक फ़ैसला लिया है। वो ये कि अब गाँव में गालियाँ नहीं सुनने को मिलेंगी। इस नियम को तोड़ने पर जुर्माना देना होगा। इस तरह छोटे-बड़े, स्त्री-पुरुष सभी मिलकर अपने गाँव में गालियों पर रोक लगाकर ख़ुशी से रह रहे हैं। ये आदर्श गाँव हमारे पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में है।
गालियां क्यों बैन की गईं?:
शब्द ही लोगों को दुश्मन बनाते हैं। मीठी बातें दोस्ती बढ़ाती हैं और कड़वी बातें दुश्मनी। यानी लोगों के बीच मतभेद की वजह उनके बोल ही होते हैं, ये बात महाराष्ट्र के अहल्यानगर ज़िले के सौंदल गाँव वालों ने समझी।
हमारा अच्छा व्यवहार ही अगली पीढ़ी को विरासत में मिलेगा... उनके अच्छे के लिए हमें भी संस्कारी होना होगा, ऐसा इस गाँव के लोगों ने सोचा। गालियों से महिलाओं का सम्मान तो कम होता ही है, बच्चे भी ये शब्द सीखकर बिगड़ जाते हैं। कई बुराइयों की जड़ गाली-गलौज ही होती है। इसलिए गाँव वालों ने गालियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी।
मज़ाक में ही नहीं, झगड़े के दौरान भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल इस गाँव में मना है। सिर्फ़ बड़े-बुज़ुर्गों ने ही नहीं, बल्कि ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित करके गालियों पर रोक लगाई गई है। गाँव के सभी लोग एक-दूसरे के साथ प्रेम से रहें, इसीलिए गालियों पर बैन लगाया गया है।
गाली देने पर सज़ा क्या है?
आमतौर पर झगड़ों में गालियाँ निकल ही जाती हैं। कई बार अनजाने में भी मुँह से गाली निकल जाती है। जानबूझकर या अनजाने में, सौंदल गाँव में गाली देने पर जुर्माना भरना पड़ेगा। नियम तोड़ने पर ₹500 का जुर्माना देना होगा।
सौंदल गाँव वालों के इस फ़ैसले की हर तरफ़ तारीफ़ हो रही है। इससे बच्चे गंदी भाषा नहीं सीखेंगे और महिलाओं का सम्मान भी बना रहेगा। गाँव में भाईचारा बना रहे, इसके लिए ये फ़ैसला बहुत ज़रूरी है।
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