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बड़े पापा की आंखों के सामने देखी मौत: छोटी सी उम्र में खून खराबे से डर यह युवती अब बनी साध्वी,पढ़िए रोचक मामला
राजस्थान के जैन समाज में अक्सर हमने ऐसे कई किस्से सुने होंगे कि छोटी सी उम्र में कोई दीक्षा ले रहा है। इसी बीच राजस्थान के अजमेर जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां 12 साल की उम्र में ही साधु-संतों से प्रभावित होने के बाद अब बनी साध्वी।

अजमेर शहर की रहने वाली एक युवती करीब 7 हजार किमी पैदल चलने के बाद वह दीक्षा ले रही है। हम बात कर रहे हैं युवती नेहा की। जो मूल रूप से बिहार के किशनगंज की रहने वाली है।
परिवार पिछले कई दिनों से अजमेर में ही रह रहा है। नेहा ने बताया कि जब वह 12 साल से भी कम उम्र की थी उसी दौरान एक दिन वह अपने बड़े पापा के साथ मार्केट में जा रही थी।
उसी दौरान लूट के इरादे से आए बदमाशों ने उसके बड़े पापा पर दनादन फायरिंग की। जिससे कि उसके बड़े पापा राजेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई।
इस घटना के बाद नेहा इतनी बुरी सहमी कि उसे हिंसा से डर लगने लगा। इसी बीच उसके घर पर साधु-संतों का आना-जाना शुरू हो गया। ऐसे में उसने इन साधु संतों से ही धर्म के ग्रंथ और अन्य चीजें सुनना शुरू कर दिया।
साधु संतों के आने जाने के चलते मासूम बच्ची इन सबसे इतनी ज्यादा प्रभावित हुई कि उसने साधु-संतों के साथ पैदल सफर तय करने का फैसला कर लिया। इसके बाद वह 13 साल तक संतों के नियम पूरे करने के बाद साध्वी बनेगी।
इतनी छोटी सी उम्र में दीक्षा ग्रहण करने से पहले उसके परिवार वालों ने उसे रोका भी लेकिन उसने एक भी नहीं सुनी और अब नेहा साध्वी बन चुकी है। इसके अलावा राजस्थान की करीब 4 अन्य युवतियां भी छोटी उम्र में साध्वी बनी है। इस बारे में साध्वी नेहा का मानना है कि जीवन का अंतिम चार वैराग्य ही है इसे छोटी उम्र में अपना लेना ही सही है।
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