राजस्थान में बेमौसम हो रही बारिश, आंधी और तूफान के चलते लोगों पर कुदरत का कहर जारी है। अजमेर में हुई इस बारिश में नींबू के आकार के ओले गिरने से चपेट में आए दादा पोते की दर्दनाक तरीके मौत हो गई। शरीर पर इतने ओले पड़े कि एक एक हड्डी चकनाचूर हो गई।

जैसलमेर (ajmer news). आंधी तूफान के बीच राजस्थान के रेगिस्तान यानि जैसलमेर शहर में इतने ओले गिरे कि इन ओलों की चपेट में आने से दो जानें चली गई। सड़क से रास्ता भटककर रेगिस्तान की ओर जा पहुंचे दादा पोते पर ये ओले किसी बम की तरह गिरे और दोनो की हड्डियां टूट गई। छुपने के लिए जगह नहीं मिली और दोनो की तड़प तड़प कर मौत हो गई। देर शाम से परिवार दोनो की तलाश करता रहा, दोनो की लाशें सोमवार, 29 मई की सुबह सवेरे बरामद हुई। घटना जैसलमेर जिले की है और इस घटना के बाद से गांव में कोहराम मचा हुआ है।

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जैसलमेर में 80 किमी की रफ्तार से उठा तूफान 

दरअसल रविवार को जैसलमेर में करीब अस्सी किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से तूफान उठा। दोपहर में उठे इस तूफान ने पूरे शहर में रेत ही रेत कर दी। उसके कुछ देर के बाद इतनी बारिश हुई कि लोग जहां थे वहीं ठहरे रह गए। शाम को जैसलमेर के रामदेवरा निवासी कानाराम अपने बारह साल के पोते विक्रम के साथ बकरियां चराने निकला। इस दौरान बारिश थम गई थी। दोनो गांव के पास सड़क पर बकरियां चरा रहे थे कि अचानक फिर से बारिश हुई और इस दौरान नींबू की साइज के ओले गिरे।

राजस्थान में कुदरत ढा रही कहर, ओलों ने तोड़ दी दादा पोते के शरीर की हड्डियां

बारिश और आंधी के चलते बकरियां तो दौड़ गई और गांव पहुंच गई। लेकिन तेज अंधड़ के कारण दादा और पोता रास्ता भटक गए। दोनो को पता ही नहीं चला कि वे गांव की ओर नहीं रेगिस्तान की ओर जा रहे हैं। बचने के लिए एक पेड़ तक का सहारा नहीं मिला। आज जब दादा और पोते की लाशें मिली तो उनकी हालत देखकर घर वालों के रौंगटे खड़े हो गए। पूरा शरीर सूजा हुआ था। कई जगह फफोले हो गए थे और उनमें से खून रिसकर सूख गया था। प्रशासन का कहना है कि तेजी से गिरे ओलों के कारण सिर और शरीर की हड्डियां चटक गई। दोनों की लाशें को मुर्दाघर में रखवाया गया है।

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