राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में बारिश के लिए महिलाओं ने 100 साल पुराना टोटका किया, जिसके बाद मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। इस टोटके को 'धाड़ निकालना' कहते हैं जिसमें महिलाएं पुरुषों के कपड़े पहनकर सड़क पर निकलती हैं।

बांसवाड़ा. राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में 100 पुराना टोटका करते ही चमत्कार हो गया। जिस बारिश के लिए लोग कई दिनों से परेशान थे,फसलें सूखने की कगार पर खड़ी थी। उन्हें महिलाओं द्वारा बरसों पुराना टोटका करते ही नया जीवन मिल गया। क्योंकि कुछ ही देर में मूसलाधार बारिश होने लगी थी। दरअसल, इस प्राचीन टोटके को धाड़ निकालना कहते हैं। जिसके तहत महिलाएं पुरुषों के कपड़े पहनकर सड़क पर निकलती हैं। उनके हाथों में लट्ठ और तलवारें थी। इस दौरान घर के मर्द बाहर नहीं निकलते हैं। ऐसा ही शनिवार को किया गया और जोरदार बारिश होने लगी।

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टोटका करते ही शुरू हुई मूसलाधार बारिश

राजस्थान में प्राचीन मान्यताओं और टोटकों पर लोगों का गहरा विश्वास है। प्रदेश के बांसवाड़ा जिले में हाल ही में एक चमत्कारिक घटना घटी है। गांव की महिलाओं द्वारा बारिश को लेकर किया गया 100 साल पुराना टोटका इतना प्रभावी रहा कि उसी समय बारिश शुरू हो गई और वह भी मूसलाधार। इस वर्ष बांसवाड़ा में बारिश की कमी से लोग चिंतित थे और सूखा पड़ने की आशंका ने ग्रामीणों को पारंपरिक उपायों की तरफ मोड़ दिया।

पुरुष के कपड़े पहनकर निकाली धाड़

स्थानीय महिलाओं ने एक सौ साल पुरानी प्रथा का पालन करते हुए इंद्रदेव को प्रसन्न करने की कोशिश की। इस प्रथा के अनुसार, महिलाओं ने पुरुषों के कपड़े पहनकर हाथ में लाठी और तलवार लेकर सड़कों पर "धाड़" निकाली। इस प्रक्रिया को स्थानीय भाषा में "धाड़ निकालना" कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है डकैती डालना। हालांकि, इसका वास्तविक उद्देश्य फसलों को सूखा से बचाना होता है।

आसमान में छाने लगे बादल

जैसे ही महिलाओं ने इस परंपरा का पालन किया, आसमान में बादल छा गए और अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। इसी के साथ किसानों की फसलों को लेकर चिंता भी दूर हुई। क्योंकि कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण फसलें खराब होने की आशंका था।

बाहर नहीं आते हैं पुरुष

बांसवाड़ा के बुजुर्गों ने बताया कि यह परंपरा सदियों पुरानी है। ​जिसके तहत महिलाएं पुरुष के कपड़े पहनकर सड़क पर आती है। इस दौरान घर के पुरुष अंदर ही रहते हैं। उनको बाहर आने के लिए मना कर दिया जाता है। कहा जाता है कि जब बारिश नहीं आने से जनता परेशान होने लगे तो इस परंपरा का निर्वहन किया जाता है।

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