राजस्थान के बीकानेर में रहने वाले एक लड़के ने साइंस के फील्ड में ऐसा आविष्कार किया जिसे देख सब हैरान हैं। उसने एक दिव्यांग की पीड़ा सुनकर सिर्फ पांच हजार की लागत से एक नकली हाथ बना दिया। जो एक दम असली की तरह काम करता है।

बीकानेर (राजस्थान). साइंस के क्षेत्र में क्या-क्या आविष्कार नहीं हो रहे। ऐसा ही एक आविष्कार राजस्थान के बीकानेर जिले में भी हुआ है। जहां एक ही युवक ने लैब में आए दिव्यांग का दर्द सुनकर ही आविष्कार कर दिया। युवक ने 5 हजार रुपए में बिल्कुल असली जैसा हाथ बना दिया है।

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दिव्यांग की पीडा सुनी तो कर दिया कमाल

दरअसल, बीकानेर के गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज में लैब में स्टूडेंट्स प्रैक्टिकल कर रहे थे। इसी दौरान वहां एक दिव्यांग शख्स आया। जिसने कहा कि तुम लोग क्या बड़े-बड़े काम करते हो। कुछ ऐसा करो जिससे कि मेरे लिए तो चमत्कार जैसा हो जाए। यह बात लैब में ही बैठे अश्मीत सिंह ने सुन ली जिसने इस बात को अपने दिल पर ले लिया।

40 दिन में रोबोटिक हैंड बनकर तैयार

बस फिर क्या था उसी दिन से अश्मीत ने ठान ली कि चाहे कुछ भी हो उसे दिव्यांग के लिए एक कृत्रिम हाथ तैयार करना है। ऐसे में युवक ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर दिया और करीब 40 दिन में रोबोटिक हैंड बनकर तैयार हो गया। अश्मीत का कहना है कि यदि किसी के किसी कारण से दोनों हाथ चले जाते हैं तो उनके लिए भी यह रोबोटिक हैंड बेहद उपयोगी है। इसके अलावा कारखानों में काम करने के दौरान मजदूर अपना हाथ बचाने के लिए इस मशीन रोबोटिक हैंड को काम में ले सकते हैं।

मदरबोर्ड और माइक्रोकंट्रोलर बोर्ड से बना है ये स्पेशल हाथ

इस हैंड की कीमत करीब 5 हजार रुपए है। जिसमें मदरबोर्ड और माइक्रोकंट्रोलर बोर्ड का भी प्रयोग किया गया है। इस हैंड में फिंगर मूवमेंट के लिए पोटेंसियो मीटर लगाया गया है। इसके अलावा एक बैटरी भी लगाई गई है। जिसे आधा घंटा चार्ज करने पर वह 2 घंटे तक तो बड़े आराम से चलती है। अश्मीत बताते हैं कि उस दिव्यांग का दर्द देख ही उनके मन में इस हैंड को बनाने का ख्याल आया। आगे भी वह यह हैंड जरूरतमंद के लिए बनाते रहेंगे। जिससे कि लोगों को राहत मिल सके। इसके अलावा यह भी प्रयास करेंगे कि इसकी कीमत में ज्यादा बढ़ोतरी न हो जिससे कि एक आम आदमी भी जरूरत होने पर इस हैंड को खरीद सके।