राजस्थान में चुनावी साल में कांग्रेस सीएम अशोक गहलोत आए दिन बड़ी घोषणाए कर रहे है। हर वर्ग को साधने में लगी सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन धारकों की रूकी हुई पेंशन देने की घोषणा कर दी है। यह पेंशन जनवरी से बंद थी। हालांकि 18 लाख पेंशनर्स अभी भी बचे।

जयपुर (jaipur news). चुनावी साल में मुख्यमंत्री एक के बाद एक घोषणा कर प्रदेश के हर वर्ग को साधने में लगे हुए हैं। इस साल के बजट में सीएम मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि राजस्थान में सामाजिक सुरक्षा पेंशन धारकों को हर महीने 1 हजार रुपए पेंशन मिलेगी। हालांकि ऑफलाइन से ऑनलाइन सिस्टम अपडेट होने के चलते जनवरी से यह पेंशन रोकी गई थी। लेकिन अब 1 जून से पेंशन धारकों को यह पेंशन मिलने वाली है। इसके साथ ही उन्हें बीते 5 महीनों के बकाया पेंशन की राशि भी मिलेगी।

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राजस्थान में 58 लाख लोग है सामाजिक सुरक्षा पेंशन के पात्र लोग

आपको बता दें कि राजस्थान में करीब 58 लाख से ज्यादा लोग ऐसे हैं। जो सामाजिक सुरक्षा पेंशन धारक है। वर्तमान में चल रहे महंगाई राहत शिविर में करीब 40 लाख पेंशन धारकों ने अपना रजिस्ट्रेशन सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए करवा लिया है। पहले राजस्थान में इस पेंशन की राशि 500 थी। जिसे बाद में बढ़ाकर 750 रूपए और फिर सीएम अशोक गहलोत ने इसे 1000 हर महीने कर दिया। हालांकि महंगाई राहत शिविर में रजिस्ट्रेशन नहीं करवाने के चलते करीब 18 लाख पेंशन धारक अभी इससे वंचित है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह लोग भी आगामी दिनों में अपना रजिस्ट्रेशन पेंशन के लिए करवा सकते हैं। जिन्हें फिर 1 महीने के अंतराल के बाद पेंशन मिलना शुरू हो जाएगी।

जनवरी से रोकी गई थी राजस्थान में सामाजिक सुरक्षा पेंशन

वही आपको बता दें कि यह पेंशन जनवरी से रोक दी गई थी। क्योंकि एक सरकारी ऐप से पूरे सिस्टम को जोड़ा गया था। जिसमें पेंशन धारकों का रजिस्ट्रेशन भी क्रॉस वेरीफाई हुआ। लेकिन अब यह काम पूरा हो चुका है। ऐसे में अब 4 दिन के बाद पेंशन धारकों को पेंशन तो मिलेगी। केवल इतना ही नहीं पेंशन धारकों को बीते 5 महीनों का बकाया अमाउंट भी मिलेगा।

वहीं इस मामले में राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सीएम अशोक गहलोत चुनावी साल में किसी भी हाल में यह नहीं चाहते कि बजट में की गई घोषणा पूरी नहीं हो। ऐसे में लगातार वह घोषणाओं के हर एक काम की मॉनिटरिंग खुद कर रहे हैं। ऐसे में चुनावी साल में जब लोगों को बढ़ी हुई पेंशन मिलेगी तो माना जा रहा है कि सरकार को भी चुनाव में इसका फायदा मिल सकता है।

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