राजस्थान के आरएसएस के प्रचारक को एसीबी ने 20 करोड़ की रिश्वत लेने के मामले में केस दर्ज किया गया था। जहां कोर्ट ने सुनवाई करने के बाद जजमेंट देते हुए f.i.r. रद्द करने की बात कही। साथ ही बताया की पीड़ित के खिलाफ रिश्वत लेने के कोई सबूत नहीं मिले।

जयपुर (jaipur news). राजस्थान की राजधानी जयपुर से आरएसएस प्रचारक निंबाराम के खिलाफ 20 करोड़ की रिश्वत के मामले में उन्हें बड़ी राहत मिली है। निंबाराम के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो ने केस दर्ज करके जांच पड़ताल शुरू की थी । उन पर आरोप था कि जयपुर में सफाई का काम करने वाली बीवीजी कंपनी से उन्होंने करोड़ों रुपयों की रिश्वत ली है। दरअसल निंबाराम के खिलाफ सरकार की मंजूरी के बाद केस दर्ज किया गया था। उन पर आरोप था कि जयपुर में सफाई का काम करने वाली फर्म का 276 करोड़ रुपए के भुगतान में उन्होंने 20 करोड़ की रिश्वत ली है।

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वीडियो के आधार पर की गई थी सख्ती

10 जून 2021 को एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें निंबाराम , मेयर सौम्या गुर्जर के पति राजा राम गुर्जर , बीवीजी कंपनी के संचालक दिख रहे थे और घूस की बातें कर रहे थे। इस मामले में बीवीजी कंपनी के ओंकार एवं संदीप को जेल जाना पड़ा था। साथ ही मेयर के पति राजाराम गुर्जर को भी कुछ दिन जेल में रहना पड़ा था। निंबाराम को गिरफ्तार नहीं किया गया था, लेकिन उनके खिलाफ सख्ती शुरू कर दी गई थी। बाद में निंबाराम ने अपने खिलाफ दर्ज किए गए केस पर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

हाईकोर्ट ने सुनाया अपना फैसला

हाईकोर्ट में उन्होंने कहा था कि यह सब कुछ राजनीतिक द्वेष के लिएकिया जा रहा है। उनका इस कंपनी से कोई लेना-देना ही नहीं है। हाईकोर्ट ने इस मामले को सुना और 27 फरवरी को लिखित बहस के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज दोपहर बाद हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया कि निंबाराम निर्दोष है। उनके खिलाफ केस ही नहीं बनता।

एसीबी के तमाम सबूत को रद्द कर दिया गया और f.i.r. कैंसिल करने के निर्देश जारी कर दिए गए। इस मामले में विधानसभा में भी गूंज हुई। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कांग्रेस सरकार पर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था।