राजस्थान की जेल पुलिस के साथ सबकुछ सही नहीं चल रहा है। यहां 5 हजार कर्मचारियों भूखे पेट अपनी नौकरी कर रहे है। इसकी वजह है उनकी सामान्य पुलिस कर्मचारियों की सेलरी की असामनता। जेल कर्मचारियों ने सीएम गहलोत सरकार पर ध्यान नहीं देने की बात कही।

जयपुर (jaipur News). राजस्थान में जेल विभाग में सब कुछ सही नहीं चल रहा है। विभाग में बड़े अफसर यानि IPS और RPS स्तर के अफसर तो अपने दफ्तरों में बैठें हैं लेकिन करीब पांच हजार से भी ज्यादा जेल स्टाफ पगार को लेकर हाहाकार मचाए है। साल के अंत में चुनाव होने वाले हैं। जेल स्टाफ का कहना है कि सीएक गहलोत हर विभाग की सुनवाई कर रहे हैं, लेकिन हम जो मांग तीस साल से कर रहे हैं उस बारे में कोई सुनवाई नहीं है। पिछले तीन दिन चार दिन से जेल स्टाफ ने धरने प्रदर्शन को सख्त कर दिया है। इसी कारण अब स्टाफ बीमार होने लगा है। राजस्थान में वर्तमान में करीब एक सौ दस जेलें हैं। इनमें सेंट्रल जेल से लेकर जिला जेल, सब जेल शामिल हैं।

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राजस्थान जेल पुलिस को मिल रही कम पगार, 30 सालों से कर रहे मांग

दरअसल जेल में लगा हुआ स्टाफ तीस साल से एक ही मांग कर रहा है। इस मांग को करते करते कई कार्मिक तो रिटायर तक हो गए हैं। जेल स्टाफ का कहना है कि जिस तरह पुलिस का काम लगभग पूरे दिन रहता है, उसी तरह जेलों के अंदर जेल स्टाफ भी बारह घंटे तक काम करता है। जितनी परेशानी पुलिस को होती है, उससे कई गुना ज्यादा परेशानी जेल कार्मिकों को है। इतना होने के बाद भी सरकार जेल वालों की तुलना में पुलिस वालों को ज्यादा वेतन देती है और बारह महीने की तरह तेरह महीने का वेतन देती है।

अपनी सैलरी की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे 5 हजार कर्मचारी

दोनो विभाग एक ही हैं लेकिन उसके बाद भी पगार को लेकर दोनो विभागों में बहुत अंतर है। पुलिस वालों के समान वेतनमान पाने के लिए फिर से आंदोलन शुरू किया गया है। पहले दस दिनों तक तो जेल स्टाफ ने जेल में काली पट्टी बांधकर काम किया। अब जेल स्टाफ ने 21 जून से भूख और मैस हड़ताल शुरु कर दी है। यानि वे मैस में खाना नहीं खाएंगे और दो से तीन दिन तक भूख हड़ताल पर रहेंगे। इसका असर यह है कि चौबीस घंटे में बीस से ज्यादा की तबियत बिगड़ गई है। लेकिन सरकार सुनने को तैयार नहीं है।

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