पति की मृत्यु के बाद टूट चुकी खुशबू ने विधवा कोटे से नौकरी पाने के बाद भी हार नहीं मानी और अब असिस्टेंट प्रोफेसर बनकर समाज को दिया मुँहतोड़ जवाब।

जोधपुर. हमेशा कहा जाता है कि पति की मौत के बाद पत्नी टूट जाती है। ऐसे में वह घर के कामों को भी ठीक से नहीं कर पाती। यदि कुछ करना भी चाहती है तो समाज के लोग उसे ताने देते हैं। लेकिन इन सब बातों को गलत ठहरा दिया है जोधपुर के फलौदी की रहने वाली खुशबू चारण ने। जिनका हाल ही में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयन हुआ है।

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19 साल की उम्र में शादी और फिर हुई विधवा

33 साल की खुशबू की शादी 6 फरवरी 2010 को जैसलमेर के पोकरण इलाके के रहने वाले नरेंद्र सिंह के साथ कर दी गई। केवल 19 साल की उम्र में शादी होने के बाद यह पारिवारिक कामों में लग गई। लेकिन 2012 में उनके पति की एक सड़क हादसे में मौत हो गई। खुशबू पूरी तरह से टूट चुकी थी।

ससुर ने विधवा बहू को बेटी की तरह पढ़ाया

 ससुर विजयदान ने अपनी बहू को हिम्मत दी और कहा कि तुम्हें आगे बढ़ना है। साल 2015 में खुशबू ने पढ़ाई करना शुरू किया। पहले तो इनका चयन थर्ड ग्रेड टीचर में साल 2017 में हुआ और अब उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर सफलता मिली है। खुशबू बताती है कि विधवा कोटा में नौकरी लगने के बाद भी जब वह परीक्षा की तैयारी करती तो उन्हें लोग कहते कि अब तो सिलेक्शन हो चुका है तो सरकारी नौकरी की तैयारी करने की क्या जरूरत है।

खुशबू की जिद ने दिला दी शानदार कामयाबी

 खुशबू का मानना था कि समाज के लोगों की सोच ऐसी होती है कि वह सोचते हैं यदि विधवा कोटे से नौकरी लगी है तो किस बात की नौकरी। इसलिए उसने लगातार तैयारी करना जारी रखा। और इसके बाद यह सफलता हासिल भी कर ली। खुशबू बताती है कि यदि हम कुछ हासिल करना चाहते हैं तो हर चीज आसान हो जाती है बस हमें उसके लिए मेहनत करनी होती है।

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