खाटू श्याम के दरबार में एक भक्त बड़े की अनूठे तरीके से हाजरी लगाने के लिए पहुंच रहा है। यहां कई भक्त रिंगस से पैदल जाते हैं। लेकिन एक भक्त अपने गृहनगर से ही गुलांटियां मारते हुए जा रहा है।

सीकर. वैसे तो हर व्यक्ति अपने बचपन में गुलांटियां खाते हैं। क्योंकि बच्चों को खेलकूद में ये अच्छा भी लगता है। लेकिन एक उम्र के बाद बच्चे भी गुलांटियां मारना छोड़ देते हैं। क्योंकि ये डर भी हो जाता है कि कहीं कोई हड्डी या नस इधर उधर हो गई तो और दिक्कत खड़ी हो जाएगी। इसके बावजूद एक श्याम प्रेमी गुलांटियां मारते हुए खाटू श्याम पहुंच रहा है।

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पैदल नहीं गुलांटियां खाते हुए जा रहा भक्त

इन दोनों जुबान पर नाम है तो केवल राम मंदिर का। कोई भक्त अयोध्या पैदल चलकर आ रहा है तो कोई स्केटिंग करके। लेकिन इसी बीच सीकर के प्रसिद्ध खाटू मंदिर के एक भक्त की चर्चा बेहद सुर्खियों में है। इसने कोई करोड़ का दान नहीं दिया बल्कि यह तो ऐसी यात्रा करके खाटू पहुंच रहा है इसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता...

हरियाणा से राजस्थान

हम बात कर रहे हैं हरियाणा के महेंद्रगढ़ निवासी बंटी की। जो पिछले पांच सालों से खाटू श्याम जी आ रहा है। वैसे तो यह आर्मी की तैयारी करता है। लेकिन खाटू आने के लिए यह हमेशा तैयार रहता है। यहां तक कि वह तो अपने जन्मदिन को भी खाटू मंदिर में सेलिब्रेट करना चाहता है।

अनूठे तरीके से जाने की थी इच्छा

पिछले कई दिनों से बंटी की इच्छा थी कि इस बार वह कुछ अलग तरीके से बाबा खाटू श्याम के मंदिर तक पहुंचे। ऐसे में उसने महेंद्रगढ़ से गुलाटी यात्रा शुरू की है। हालांकि उसके साथ कई अन्य लोग भी शामिल है जो उसकी मदद कर रहे हैं। ऐसे में बंटी महेंद्रगढ़ से गुलांटिया मार कर खाटू धाम के लिए रवाना हुआ है। उसे इस पूरे सफर में करीब 10 दोनों का समय लगा। लेकिन अब इसकी चर्चा भी बेहद ज्यादा है।

एक करोड़ से अधिक भक्त आते

आपको बता दे कि यह राजस्थान का वह मंदिर है जहां हर साल एक करोड़ से ज्यादा भक्त दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। होली के पहले यहां बाबा श्याम का वार्षिक मेला आयोजित होता है। जिसमें करीब 35 से 40 लाख श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। केवल इंडिया ही नहीं बल्कि दूसरे देशों से भी भक्त यहां दर्शन करने के लिए आते हैं।