मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से नोटिस दिया गया है। तीन दिन पहले गहलोत ने ज्यूडिशरी को लेकर एक बयान दे दिया था जिस पर कोर्ट ने जवाब मांगा है।

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। प्रतापगढ़ में महिला को निर्वस्त्र कर घुमाने के मामले को कुछ काबू करने के बाद अब मुख्यमंत्री पर एक नई मुसीबत आ गई है। अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राजस्थान हाईकोर्ट ने ज्यूडिशरी पर दिए एक बयान पर नोटिस दिया है और जवाब भी मांगा है।

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सीएम गहलोत ने ज्यूडिशरी पर ये दिया था बयान
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 3 दिन पहले एक बयान दिया था। उस दौरान इस बयान को मीडिया ने काफी उछाला गया था।‌ सीएन ने ज्यूडिशरी के खिलाफ बयान दिया था कि कुछ वकील तो ऐसे हैं जो खुद ही जजमेंट लिखकर ले जाते हैं और वही जजमेंट जज पढ़कर सुना देते हैं। इस बयान के बाद ज्यूडिशरी पर गंभीर आरोप लगे थे।

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वकीलों ने सीएम को घेरा
बयान के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को जब वकीलों ने घेरा और उनके खिलाफ प्रदर्शन किया तो सीएम ने कहा कि यह उनकी निजी राय नहीं है। सुप्रीम कोर्ट तक के कई रिटायर्ड जज इस तरह के बयान दे चुके हैं।लेकिन यह बयान मुख्यमंत्री को बचाने के लिए काफी साबित नहीं हुआ।

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सीएम से हाईकोर्ट का नोटिस
जुडिशरी के खिलाफ दिए गए बयान के मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ अधिवक्ता राजस्थान हाईकोर्ट पहुंच गए और उन्होंने मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए बयान के खिलाफ पीआईएल लगाई। इसके जवाब में अब हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को नोटिस दिया है और जवाब मांगा है कि उन्होंने इस तरीके का बयान क्यों दिया है।

राजस्थान हाईकोर्ट में शुक्रवार को शिवदयाल नाम के एक सीनियर वकील ने पीआईएल दाखिल की थी और इसपर सुनवाई में आज मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को नोटिस जारी कर दिया गया है।