सीकर में मोटर दुर्घटना वाद न्यायाधिकरण ने सड़क दुर्घटनाओं के मृतकों के परिजनों को करोड़ों का मुआवजा देने का आदेश दिया। यह फैसले सड़क सुरक्षा और जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाले हैं।

सीकर। राजस्थान के सीकर में मोटर दुर्घटना वाद न्यायाधिकरण ने दो अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों के परिजनों को करोड़ों का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इन निर्णयों ने सड़क सुरक्षा और जिम्मेदारी को लेकर एक बार फिर जागरूकता का संदेश दिया है।

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पहला मामला: अध्यापिका की दर्दनाक मौत

पहले मामले में, अध्यापिका सुमित्रा देवी की 24 नवंबर 2020 को सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। घटना उस समय हुई जब सुमित्रा देवी स्कूटी पर गणेशपुरा स्थित अपने कार्यस्थल जा रही थीं। लोसल और बोसाणा के बीच एक पिकअप वाहन के चालक हरफूल सिंह ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में सुमित्रा देवी की मौके पर ही मृत्यु हो गई। मृतका के बेटे चेतन चौधरी और बेटी हिना ने वाहन चालक, वाहन मालिक और बीमा कंपनी के खिलाफ न्यायालय में दावा पेश किया।

मृतका के परिजनों को 1.26 करोड़ के मुआवजे का आदेश

न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई के बाद मृतका के परिजनों को 1.26 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। न्यायाधीश रेखा राठौड़ ने निर्देश दिया कि मुआवजा राशि दो महीने के भीतर परिवादियों को दी जाए।

दूसरा मामला: मोटरसाइकिल सवार की मौत

दूसरे मामले में, एक मोटरसाइकिल सवार की सड़क दुर्घटना में मौके पर ही मौत हो गई थी। इस हादसे में मृतक के आश्रितों ने मुआवजे के लिए दावा किया था। न्यायालय ने इस मामले में मृतक के परिजनों को 78.44 लाख रुपये की मुआवजा राशि देने का आदेश दिया।

न्याय के साथ जागरूकता

इन दोनों मामलों में न्यायालय के निर्णयों ने यह संदेश दिया है कि सड़क पर लापरवाही से वाहन चलाने वाले अब कानून से नहीं बच सकते। इसके साथ ही, बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की गई है।

सड़क सुरक्षा का महत्व

इन घटनाओं ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया है कि यातायात नियमों का पालन कितना जरूरी है। न्यायालय के ये निर्णय पीड़ित परिवारों के लिए राहत का माध्यम बने हैं और समाज में जिम्मेदार वाहन चालन का संदेश देते हैं।

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