Inspiration Story: रुमादेवी की अधूरी पढ़ाई ने जन्म दिया एक मिशन, जो 25 लाख रुपये की छात्रवृत्ति से सैकड़ों बेटियों के सपने सच कर रही है। जानिए कैसे आर्थिक तंगी से लड़कर बनी ये महिला शिक्षा की मशाल और समाज में बदल रही है कई ज़िंदगियां।

Rumadevi Scholarship Scheme: कभी चौथी कक्षा के बाद आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी, लेकिन आज वही रुमादेवी सैकड़ों बेटियों की शिक्षा का सहारा बन चुकी हैं। राजस्थान की इस सामाजिक कार्यकर्ता ने शिक्षा के महत्व को न सिर्फ समझा, बल्कि इसे दूसरों तक पहुंचाने का संकल्प लिया। इसी कड़ी में रविवार को वे 25 लाख रुपये की छात्रवृत्ति जरूरतमंद बेटियों में वितरित करेंगी।

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‘अक्षरा छात्रवृत्ति योजना’ से मिलेगा सहारा 

रुमादेवी द्वारा शुरू की गई ‘रुमा देवी सुगणी देवी अक्षरा छात्रवृत्ति योजना’ के तहत आठ मेधावी बेटियों को 1-1 लाख रुपये का अवार्ड दिया जाएगा। शेष राशि अन्य जरूरतमंद छात्राओं की पढ़ाई पर खर्च की जाएगी। पिछले चार वर्षों में वे तीन करोड़ रुपये से अधिक की सहायता बांट चुकी हैं, जिससे सैकड़ों बेटियां अपनी पढ़ाई जारी रख पा रही हैं।

अपनी अधूरी पढ़ाई से मिली प्रेरणा 

रुमादेवी ने बताया कि आर्थिक परिस्थितियों के कारण वे खुद आगे नहीं पढ़ पाईं। इस अधूरी इच्छा ने ही उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में काम करने की प्रेरणा दी। उनका मानना है कि बेटियों को पढ़ाना सबसे बड़ा निवेश है, जो समाज और देश दोनों का भविष्य बदल सकता है।

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कार्यक्रम में मिलेगा प्रेरणा और संस्कृति का संगम 

जोधपुर के मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में होने वाले इस कार्यक्रम में संतों द्वारा जीवन मूल्यों पर प्रवचन दिया जाएगा। साथ ही राजस्थान की लोक कलाओं और लुप्त हो रही पारंपरिक विधाओं का मंचन भी होगा। इससे युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों की छात्राओं को मिलेगा लाभ

इस बार छात्रवृत्ति का फोकस मेडिकल और इंजीनियरिंग पढ़ रही बेटियों पर रहेगा। रुमादेवी का कहना है कि इन क्षेत्रों में पढ़ाई महंगी होने के कारण कई मेधावी छात्राएं बीच में पढ़ाई छोड़ देती हैं। इस वित्तीय सहयोग से वे बिना रुकावट के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेंगी।

सिर्फ आर्थिक मदद ही नहीं, प्रेरणा भी 

रुमादेवी मानती हैं कि सिर्फ धनराशि देना ही काफी नहीं है। छात्रवृत्ति के साथ वे बेटियों को आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और समाज सेवा के महत्व पर भी मार्गदर्शन देती हैं। वे चाहती हैं कि ये बेटियां भविष्य में खुद भी दूसरों की मदद के लिए आगे आएं।

बेटियों की शिक्षा, समाज का उज्जवल भविष्य

रुमादेवी का यह प्रयास न सिर्फ व्यक्तिगत जीवन बदल रहा है, बल्कि समाज में शिक्षा के महत्व को भी मजबूत कर रहा है। उनका कहना है-“मैंने जो संघर्ष झेला, वह अब किसी बेटी को न झेलना पड़े।”

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