Sikar Raivasa Dham : राजस्थान के सीकर में देशभर के संतों का जमावड़ा लगा हुआ है। धीरेंद्र शास्त्री से लेकर बाबा रामेदव तक पहुंचे हुए हैं। इसी बीच रैवासा धाम पहुंचे RRS प्रमुख मोहन भागवत ने  वेद विद्यालय का शुभारंभ किया।  

Mohan Bhagwat Inauguration In Vedic School Sikar : राजस्थान के सीकर जिले का ऐतिहासिक रैवासा धाम इस समय धार्मिक और वैचारिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। यहां नौ दिनों तक चलने वाले विशाल आध्यात्मिक कार्यक्रम में देशभर से संत, महात्मा और भक्त जुट रहे हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत विशेष अतिथि के रूप में पहुंचे। उन्होंने संत राघवाचार्य जी महाराज की प्रतिमा का अनावरण किया और एक नए वेद विद्यालय का उद्घाटन किया।

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मोहन भागवत ने बताया संघ का उद्देश्य

  • अपने संबोधन में भागवत ने हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को विस्तार से रखते हुए कहा कि संघ का उद्देश्य केवल संगठन निर्माण नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उन्नति है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत ही ऐसा देश है जो दुनिया के कल्याण के लिए कार्य करता है और यही भावना हमें विश्वगुरु बनने की ओर ले जाएगी। उन्होंने रैवासा धाम के पीठाधीश्वर राजेंद्रदास देवाचार्य के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह स्थान प्राचीन संत परंपरा का जीवंत प्रतीक है। तुलसीदास जैसे संतों की पावन स्मृतियों से जुड़ा यह धाम आज भी तप, सेवा और धर्म प्रचार की धारा को आगे बढ़ा रहा है।

  • भागवत ने भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी बात करते हुए कहा कि आजादी के बाद कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भविष्यवाणी की थी कि भारत में लोकतंत्र टिक नहीं पाएगा, लेकिन संतों के आशीर्वाद और जनता की आस्था ने इसे दुनिया में सबसे सशक्त लोकतंत्र बना दिया। उन्होंने इसे भारत की आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक मजबूती का परिणाम बताया।

धीरेंद्र शास्त्री से लेकर बाबा रामेदव तक पहुंचे

  • कार्यक्रम में कई अन्य प्रमुख संत और विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे, जिनमें कथावाचक आचार्य इंद्रेश उपाध्याय, योगगुरु बाबा रामदेव, बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री, राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े जनप्रतिनिधि शामिल थे।
  • आयोजकों के अनुसार, रैवासा धाम का यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सांस्कृतिक संगोष्ठियां, वैदिक अध्ययन सत्र और समाज सेवा के विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। आने वाले दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से साधु-संतों के यहां पहुंचने का क्रम जारी रहेगा।