Tonk Hijab Row  : राजस्थान के टोंक मेडिकल कॉलेज की इंटर्न उमामा और सीनियर डॉक्टर इंदु गुप्ता के बीच ड्यूटी पर हिजाब पहनने को लेकर विवाद हुआ। वीडियो वायरल होने के बाद मामला धर्म-राजनीति की बहस में बदल गया। पुलिस ने जांच शुरू की है। 

Tonk Medical College Hijab Controversy : राजस्थान के टोंक जिले में हिजाब पहनकर ड्यूटी करने को लेकर इंटर्न डॉक्टर और वरिष्ठ महिला चिकित्सक के बीच शुरू हुआ विवाद अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला शहर ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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बीजेपी ने किया डॉक्टर का समर्थन

 कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन हिजाब विवाद पर भारतीय जनता पार्टी खुलकर डॉक्टर बिंदु गुप्ता के समर्थन में सामने आई है। सोमवार को बीजेपी जिलाध्यक्ष चंद्रवीर सिंह चौहान के नेतृत्व में पार्टी नेताओं ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर धार्मिक प्रतीकों को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए और सभी को सरकारी नियमों का पालन करना चाहिए। बीजेपी का कहना है कि अस्पताल इलाज की जगह है, न कि आस्था और धर्म की राजनीति का मंच।

'मैं हिजाब पहनकर ही ड्यूटी करूंगी…

  • जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर बिंदु गुप्ता ने इंटर्न छात्रा को ड्यूटी के दौरान हिजाब हटाने की सलाह दी। छात्रा ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वह हिजाब पहनकर ही ड्यूटी करेगी। इस दौरान का वीडियो छात्रा ने खुद रिकॉर्ड कर लिया और बाद में सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इसके बाद विवाद गहराता चला गया।
  • वीडियो वायरल होने के बाद कई मुस्लिम संगठनों ने इंटर्न छात्रा के समर्थन में मोर्चा खोल दिया। जनाना हॉस्पिटल प्रभारी से मुलाकात कर उन्होंने लेडी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। वहीं कांग्रेस पार्टी ने भी छात्रा का पक्ष लेते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक नहीं लगाई जा सकती।

मामला राजनीति बनाम धार्मिक स्वतंत्रता

  • फिलहाल इस प्रकरण में पुलिस के पास कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि अगर दोनों पक्षों से कोई लिखित शिकायत मिलती है, तभी मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
  • टोंक का यह विवाद अब सिर्फ अस्पताल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीति और समाज के बीच धर्म और पेशेवर जिम्मेदारियों की बहस को भी जन्म दे चुका है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले को किस तरह से सुलझाता है।