Auraiya Nag Mandir: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के सेहुद गांव में स्थित धौरा नाग मंदिर अपनी टूटी छत और खंडित मूर्तियों के बावजूद श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। नाग पंचमी के दिन यहां दूर-दूर से भक्त पूजा करने पहुंचते हैं।

Nag Panchami Temple: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के सेहुद गांव में एक ऐसा मंदिर है, जिसकी छत टूटी है, मूर्तियां खंडित हैं, लेकिन श्रद्धा इतनी अटूट है कि नाग पंचमी के दिन यहां जनसैलाब उमड़ पड़ता है। धौरा नाग मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि रहस्यों और मान्यताओं से भरा एक जीवंत इतिहास है।

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क्या सचमुच मंदिर की मरम्मत से आती है विपत्ति?

स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिसने भी इस मंदिर की छत को दुरुस्त कराने की कोशिश की, उसके साथ कोई न कोई अनहोनी घटी। गांव के एक इंजीनियर, जो लखनऊ में नौकरी करते थे, उन्होंने जब छत डलवाने की शुरुआत की तो उनके परिवार में दो सदस्यों की आकस्मिक मृत्यु हो गई। इसके बाद से किसी ने भी मंदिर को छूने की हिम्मत नहीं की।

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खंडित मूर्तियों की पूजा क्यों कर रहे हैं लोग?

हिंदू धर्म में टूटी हुई मूर्तियों की पूजा निषेध मानी जाती है, लेकिन इस मंदिर में खंडित मूर्तियां ही पूजा का केंद्र हैं। मंदिर की मूर्तियां 11वीं सदी में आक्रमण के दौरान क्षतिग्रस्त हुई थीं, फिर भी लोग उन्हें साक्षात नाग देवता मानकर पूजा करते हैं। यहां आस्था, परंपरा से बड़ी है।

नाग पंचमी पर लगता है मेला: कहां से आते हैं श्रद्धालु?

हर साल नाग पंचमी के अवसर पर यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। मंदिर परिसर में मेला लगता है, जहां ग्रामीण संस्कृति की झलक मिलती है। लोग यहां सर्प दोष से मुक्ति और पारिवारिक सुख-शांति की कामना लेकर पहुंचते हैं।

क्या कभी टूटेगा डर का यह चक्र?

मंदिर की छत आज भी वैसी की वैसी है, टूटी हुई, लेकिन पूजनीय। क्या यह डर है या परंपरा का पालन? या फिर कोई रहस्यमय शक्ति? इन सवालों के जवाब अभी तक नहीं मिल पाए हैं, लेकिन गांव वालों के लिए यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत विश्वास है, जिसे कोई नहीं तोड़ना चाहता।

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