Changur Baba: अंगूठी बेचने वाला 'छांगुर बाबा' बना 100 करोड़ का मालिक! धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार बाबा के खातों में करोड़ों का लेनदेन, 50 बार विदेश यात्रा, आलीशान कोठी और फर्जी संस्थाओं का नेटवर्क… अब ED की जांच में खुलेंगे मनी लॉन्ड्रिंग के राज़!

Changur Baba money laundering: उत्तर प्रदेश में कभी सड़कों पर अंगूठी और नग बेचने वाला छांगुर बाबा (असल नाम जमालुद्दीन) अब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति का मालिक निकला है। इस चौंकाने वाली जानकारी ने यूपी के सुरक्षा एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है। ATS की जांच में सामने आया है कि छांगुर बाबा और उसकी फर्जी संस्थाओं से जुड़े खातों में 100 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन हुआ है। अब ATS ने इस पूरे मामले की डिटेल रिपोर्ट ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) को सौंप दी है, जिसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जांच शुरू होने जा रही है।

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अंगूठी से अरबों तक: कैसे बना करोड़पति बाबा? 

मधुपुर गांव का रहने वाला जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा पहले नग और अंगूठियां बेचने का काम करता था। लेकिन पिछले 5-6 सालों में वह आलीशान कोठी, लग्जरी गाड़ियाँ और फर्जी संस्थाओं का मालिक बन गया। उसका मुख्य ठिकाना मधुपुर की कोठी थी, जहां से कथित धर्मांतरण नेटवर्क ऑपरेट होता था। वहीं वह एक डिग्री कॉलेज खोलने की योजना भी बना चुका था, जिसके लिए भवन का निर्माण शुरू किया जा चुका था।

50 से ज्यादा इस्लामिक देशों की यात्रा, विदेशी फंडिंग का संदेह

ADGP लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश ने पुष्टि की है कि छांगुर बाबा ने 40 से 50 बार इस्लामिक देशों की यात्रा की है। उसने बलरामपुर सहित कई जिलों में संपत्तियां खरीदीं और संदिग्ध गतिविधियों के लिए फंडिंग प्राप्त की। ATS और STF की शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि इस नेटवर्क को विदेशी फंडिंग, विशेषकर खाड़ी देशों से, लगातार आर्थिक मदद मिलती रही है।

14 सहयोगियों की तलाश, नामी चेहरे भी शक के घेरे में 

ATS और STF की टीमें बाबा के 14 मुख्य सहयोगियों की तलाश में जुटी हैं। इनमें कथित पत्रकार पैमैन रिज़वी, महबूब, पिंकी हरिजन, हाजिरा शंकर और सगीर जैसे चेहरे शामिल हैं। ये सभी या तो फरार हैं या इन पर पहले से आपराधिक केस दर्ज हैं। इनकी गिरफ्तारी से नेटवर्क के और भी गहरे राज़ सामने आ सकते हैं।

क्या कहती है ATS की रिपोर्ट? 

ATS की रिपोर्ट में बाबा की संस्थाओं से जुड़े बैंकों में बड़े पैमाने पर ट्रांजैक्शन की बात सामने आई है। जिन ट्रस्ट या संस्थाओं के नाम से पैसा आया, उनमें से कई फर्जी या दस्तावेजविहीन निकलीं। यही वजह है कि अब ईडी इस नेटवर्क की हर कड़ी को मनी ट्रेल के जरिए खंगालने जा रही है। छांगुर बाबा का यह मामला अब सिर्फ अवैध धर्मांतरण का नहीं, बल्कि एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला नेटवर्क का हिस्सा माना जा रहा है। अंगूठी बेचने से करोड़ों की कोठी तक के सफर ने जांच एजेंसियों को चौंका दिया है।