CM Yogi Latest Podcast: योगी आदित्यनाथ ने भाषा विवाद पर नेताओं को घेरा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए भाषा का मुद्दा उठाने से राज्यों का विकास रुक रहा है और युवाओं के करियर पर असर पड़ रहा है।

Yogi Adityanath on Hindi and regional languages: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश में भाषा विवाद को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कुछ नेता अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए भाषा के मुद्दे को उछाल रहे हैं, जिससे राज्यों की प्रगति बाधित हो रही है। योगी ने स्पष्ट किया कि भाषा विवाद युवाओं के करियर और रोजगार के अवसरों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

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भाषा विवाद से राज्यों की गिरती स्थिति

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाचार एजेंसी PTI को दिए साक्षात्कार में स्पष्ट कहा कि जो राज्य भाषा विवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, वहां की स्थिति धीरे-धीरे कमजोर हो रही है। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका इशारा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की ओर है, तो उन्होंने कहा— “जो भी ऐसा कर रहे हैं, उनके पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है। वे अपने राजनीतिक हित साधने के लिए भावनाओं को भड़का रहे हैं, जिससे उनके राज्यों का विकास प्रभावित हो रहा है।”

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त्रिभाषा फॉर्मूला अपनाने की अपील

सीएम योगी ने कहा कि भारत ने त्रिभाषा फॉर्मूला अपनाया है, जिसमें सभी क्षेत्रीय भाषाओं को बराबर सम्मान दिया गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार अपने छात्रों को तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, बंगाली और मराठी जैसी भाषाएं सिखा रही है, जिससे उनकी रोजगार संभावनाएं बढ़ेंगी। उन्होंने कहा, "हमें हिंदी का सम्मान करना चाहिए, लेकिन साथ ही क्षेत्रीय भाषाओं को भी बढ़ावा देना चाहिए, ताकि राष्ट्रीय एकता मजबूत हो।"

‘काशी तमिल संगमम’ राष्ट्रीय एकता का प्रतीक

मुख्यमंत्री योगी ने काशी तमिल संगमम को भाषाई एकता का सबसे बड़ा उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत की दो प्राचीन भाषाओं, संस्कृत और तमिल को जोड़ने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा, "हर भाषा की अपनी विशेषता होती है, जो हमारी राष्ट्रीय एकता को और मजबूत बनाती है। हमें भाषाई विविधता को आपसी सौहार्द का माध्यम बनाना चाहिए, न कि राजनीतिक लाभ का हथियार।"

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बात पर जोर दिया कि भाषा विवाद को बढ़ावा देना देश की एकता और युवाओं के भविष्य के लिए हानिकारक है। उन्होंने नेताओं से अपील की कि वे अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए भाषा के नाम पर समाज को बांटने का काम न करें, बल्कि क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देकर देश की अखंडता को मजबूत करें।

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