Drugs Supply from Cloud Kitchen: यूपी में क्लाउड किचन की आड़ में फूड ऐप से ड्रग्स की सप्लाई हो रही है। तस्कर और ग्राहक मेफेड्रोन (एमडीएमए) की सप्लाई के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। जांच एजेंसियां ​​इन सप्लायरों की तलाश में जुटी हैं।

Lucknow News: यूपी में क्लाउड किचन की आड़ में फूड सप्लाई ऐप के जरिए ड्रग्स तस्कर अपने ग्राहकों को ड्रग्स सप्लाई कर रहे हैं। खास बात यह है कि न तो सप्लाई करने वाले ऐप को और न ही डिलीवरी बॉय को इस बात की भनक लगती है कि वे खाने की जगह ड्रग्स सप्लाई कर रहे हैं। ड्रग्स के खिलाफ काम कर रही केंद्रीय और राज्य एजेंसियों की जांच में यह बात सामने आई है। अब एजेंसियां ​​इन सप्लायरों की तलाश कर रही हैं। एमडीएमए की सप्लाई में होता है इस्तेमाल जांच में सामने आया है कि तस्कर और ग्राहक खास तौर पर मेफेड्रोन (एमडीएमए) की सप्लाई में फूड सप्लाई ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल रेव पार्टियों और संभ्रांत वर्ग द्वारा किया जाता है। जानकारी के मुताबिक, ड्रग्स तस्कर फूड सप्लाई ऐप में खुद को क्लाउड किचन के तौर पर जोड़ते हैं। इनका मेन्यू सीमित होता है। इसके बाद वे टेलीग्राम ऐप के जरिए अपने से जुड़े खरीदारों के संपर्क में रहते हैं। खरीदारों को ड्रग्स के कोड बताए जाते हैं, जो खाने की चीजों के नाम पर होते हैं। टेलीग्राम ऐप के जरिए नशे का कारोबार

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सोशल मीडिया, डार्क वेब, सिग्नल और टेलीग्राम ऐप के जरिए इन नशे का कारोबार होता है। नशे के खरीदार संबंधित क्लाउड किचन (कोड वर्ड में नशे का नाम, मात्रा और कीमत होती है) से खास डिश ऑर्डर करते हैं। अनजाने में डिलीवरी बॉय क्लाउड किचन से इन नशे को पैक करके उठाते हैं और ऑर्डर करने वाले तक पहुंचा देते हैं। एजेंसियां ​​इस चेन की सभी कड़ियों को तलाशने में जुटी हैं।

पूरे उत्तर भारत में फैला है मणिपुर का अफीम का नशा

उत्तर भारत में अफीम की सबसे बड़ी सप्लाई, जो मॉर्फिन, हेरोइन और स्मैक के रूप में मिलती है, मणिपुर से आती है। नारकोटिक्स से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, मणिपुर में यह नशा बांग्लादेश, म्यांमार से आता है। इसके अलावा मणिपुर के कुछ इलाकों में भी इसे तैयार किया जाता है। मणिपुर से यह नशा असम, झारखंड, बिहार होते हुए चार पहिया वाहन या ट्रेन के जरिए यूपी, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान पहुंचता है। यूपी में अफीम सप्लाई का दूसरा रूट नेपाल से पाकिस्तान के रास्ते भी है। हालांकि, इस रूट पर सख्ती के चलते मणिपुर रूट से सप्लाई उतनी नहीं होती।

उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश से गांजा की सप्लाई

यूपी में गांजा, चरस और हसीस की सबसे ज्यादा सप्लाई उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश से होती है। उड़ीसा से ये ड्रग्स मध्य प्रदेश में एकत्र की जाती है और वहां से प्रयागराज बॉर्डर के जरिए यूपी में भेजी जाती है। वहीं, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ से आने वाली ड्रग्स सोनभद्र बॉर्डर से यूपी में दाखिल होती है।

2025 में अब तक 160 ड्रग तस्कर गिरफ्तार

यूपी में एएनटीएफ ने साल 2025 में अबतक 160 ड्रग तस्करों को गिरफ्तार कर कर चुकी है। इनके पास से करीब 75 करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त की गई है। वर्ष 2022 में इसके गठन के बाद वर्ष 2023 से जून 2025 तक एएनटीएफ ने 270 ऑपरेशन चलाया था। जिनमें 300 करोड़ रुपये की ड्रग्स बरामद की गई है।

DGP ने ANTF को और मजबूत करने के निर्देश दिए

डीजीपी राजीव कृष्ण ने कार्यभार संभालने के बाद ही ANTF के कामकाज की समीक्षा की। उन्होंने ANTF को अंतरराष्ट्रीय एजेंसी की तरह काम करने के निर्देश दिए हैं। एएनटीएफ को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए संसाधन और विशेषज्ञ जनशक्ति उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही एएनटीएफ मुख्यालय का नया लोगो भी तैयार किया जा रहा है।