Indian students trapped in Tehran : गाज़ियाबाद का छात्र रिजवान हैदर एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान इज़राइल-ईरान युद्ध में तेहरान में फंस गया है। हॉस्टल पर बम गिरने से बाल-बाल बचा रिजवान, परिवार ने पीएम मोदी से मदद की गुहार लगाई है।

Ghaziabad student stuck in Tehran : जब बेटा डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए ईरान गया था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि वह युद्ध की आग में फंस जाएगा। लेकिन आज गाजियाबाद के एक परिवार की रातें बेचैनी में कट रही हैं। उनका बेटा रिजवान हैदर, जो तेहरान में MBBS की पढ़ाई कर रहा है, इजराइल-ईरान के युद्ध के बीच वहां फंस गया है।

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तेहरान में फंसा गाजियाबाद का छात्र, परिवार का रो-रोकर बुरा हाल

गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र के बेहटा हाजीपुर गांव के रहने वाले मोहम्मद अली ने अपने बेटे रिजवान को एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए तेहरान भेजा था। रिजवान कुछ महीनों से वहां यूनिवर्सिटी में हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा था। लेकिन हाल ही में इजराइल और ईरान के बीच चल रही बमबारी ने उनके परिवार को चिंता में डाल दिया है।

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बमबारी के कारण बदला गया हॉस्टल, भोजन तक नसीब नहीं

निजी चैनल पर प्रकाशित खबरों के अनुसार रिजवान के पिता ने बताया कि युद्ध के हालात बिगड़ने के कारण यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों को एक हॉस्टल से दूसरे स्थान पर शिफ्ट किया था। इसी बीच रिजवान ने परिवार से संपर्क कर बताया कि वह भूखा है और आसपास का माहौल बहुत डरावना है। परिजनों ने किसी तरह से सुरक्षित तरीके से बाहर जाकर खाना खाने की सलाह दी।

हॉस्टल पर गिरा बम, बाल-बाल बचा छात्र

रविवार को जब रिजवान खाना खाने के लिए हॉस्टल से थोड़ी दूरी पर स्थित एक होटल में पहुंचा, तभी इजराइल की ओर से किए गए हमले में एक बम उसके पुराने हॉस्टल पर गिरा। धमाका इतना जोरदार था कि हॉस्टल की पूरी बिल्डिंग ध्वस्त हो गई। रिजवान की किस्मत अच्छी थी कि वह उस समय हॉस्टल में नहीं था।

PM मोदी से बेटे को वापस लाने की अपील

अब रिजवान के पिता मोहम्मद अली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भावुक अपील करते हुए कहा है कि उनके बेटे को जल्द से जल्द वहां से निकालकर भारत लाया जाए। उन्होंने केंद्र सरकार से विशेष राहत मिशन चलाने की मांग की है, जिससे उनके बेटे समेत अन्य भारतीय छात्रों की जान बचाई जा सके।

अब तक भारत सरकार की ओर से इस मसले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जिससे परिवार और ज्यादा चिंतित हो गया है। परिजन लगातार मीडिया और स्थानीय प्रशासन से संपर्क कर मदद की गुहार लगा रहे हैं।

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