सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की नर्सों द्वारा पैसे न देने पर प्रसूता की छुट्टी न किए जाने का मामला सामने आय़ा। इस मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई है।

वाराणसी: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ नर्सों की मनमानी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां प्रसूता से पैसे लेने से लिए जच्चा-बच्चा दोनों को ही अस्पताल में रोक लिया गया। प्रसूता की ओर से पैसे न होने की बात कही गई लेकिन फिर भी उसकी न सुनी गई। थक-हारकर प्रसूता ने अपना मंगलसूत्र गिरवी रखा और उसके बाद उसे छुट्टी दी गई। परिजनों ने इस घटना से आहत होकर मुख्यमंत्री के पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई है। इस मामले में लिखित शिकायत पत्र चिकित्सा अधीक्षक को भी सौंपा गया है और न्याय की गुहार लगाई गई है। इस प्रकरण के सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे की जमकर किरकिरी हुई है।

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पुत्री के जन्म पर मांगे जा रहे थे पैसे

आपको बता दें कि तेंदुआ गांव में मंगल की पत्नी बबिता अपने मायके से आई थी। गर्भवती होने के चलते उसे वहां पहुंचते ही तेज दर्द होने लगा। ऐसे में पिता शिवपूजन उसे लेकर एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। यहां पर देर रात बबीता ने एक पुत्री को जन्म दिया। इसके बाद स्टाफ नर्स उससे पैसे की मांग करने लगी।

चिकित्सा अधीक्षक ने कहा जांच के बाद होगा एक्शन

बबिता ने बताया कि उसके पास स्टाफ नर्स को देने के लिए 800 रुपए नहीं थे। हालांकि उसके द्वारा काफी कहे जाने के बाद भी स्टाफ नर्स ने उसकी एक न सुनी। वह पैसे लेने की जिद पर ही अड़ी रही और यहां तक उसे छुट्टी भी नहीं दी गई। प्रसूता ने थक-हारकर अपने पति मंगल को मंगलसूत्र गिरवी रखकर पैसे लाने के लिए कहा। जब पति ने मंगलसूत्र गिरवी रख स्टाफ नर्स को 800 रुपए दिए उसके बाद ही प्रसूता की छुट्टी की गई। इस मामले में चिकित्सा अधीक्षक अवधेश पटेल के द्वारा जानकारी दी गई कि शिकायत मिलने के बाद जांच करवाई जा रही है। स्टाफ नर्स के खिलाफ मिली शिकायत को विभाग ने गंभीरता से लिया है। जांच के बाद दोषी पाए जाने पर उसके खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाएगी।

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