Etawah New DM Shubhrant Shukla: कन्नौज के बाद अब इटावा की कमान संभालेंगे शुभ्रांत शुक्ला। जानिए उनके अब तक के प्रशासनिक सफर और इटावा में उनके सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में।

IAS Shubhrant Kumar Shukla Profile: उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक दुनिया में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो तबादलों के शोर में भी अपनी अलग पहचान बनाए रखते हैं। शुभ्रांत कुमार शुक्ला उन्हीं अफसरों में से एक हैं, जिनका नाम केवल सरकारी आदेशों की फेहरिस्त में नहीं, बल्कि जमीनी कामों और जनता से जुड़ाव के लिए जाना जाता है। अब वह इटावा जिले के नए जिलाधिकारी बनाए गए हैं। इससे पहले वह कन्नौज जिले की कमान संभाल रहे थे और वहां की बदहाल व्यवस्था को सुधारने में अहम भूमिका निभा चुके हैं।

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कन्नौज से इटावा का सफर

उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए IAS-IPS तबादलों की लिस्ट में एक बड़ा नाम शुभ्रांत शुक्ला का भी है। अब तक कन्नौज के डीएम रहे शुभ्रांत शुक्ला को इटावा जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह बदलाव प्रशासनिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है।

बहराइच के रहने वाले हैं शुभ्रांत शुक्ला

शुभ्रांत कुमार शुक्ला मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के निवासी हैं। वे 1997 बैच के पीसीएस अधिकारी रहे हैं और एलएलबी की पढ़ाई कर चुके हैं। 2017 में जब योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने, तब शुभ्रांत शुक्ला को मुख्यमंत्री सचिवालय में तैनाती मिली। अपने शांत स्वभाव और कुशल कार्यशैली के चलते वह सीएम योगी के विश्वासपात्र अधिकारियों में गिने जाने लगे।

2019 में मिला IAS प्रमोशन

शुभ्रांत शुक्ला को साल 2019 में प्रमोशन मिला और वह भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए। इसके बाद मार्च 2021 में उन्हें चित्रकूट का जिलाधिकारी बनाया गया, जहां उन्होंने लगभग 16 महीने तक कार्यभार संभाला। चित्रकूट में रहते हुए उन्होंने कई लोक-कल्याणकारी योजनाओं को ज़मीनी स्तर तक पहुंचाया।

कन्नौज में दिखाई कड़ी प्रशासनिक पकड़

16 जुलाई 2022 को शुभ्रांत को कन्नौज का डीएम बनाया गया। यहां उन्होंने बिगड़ती व्यवस्थाओं को संभाला और ज़रूरी फैसलों से व्यवस्था में स्थायित्व लाया। आम जनता से उनका सीधा संवाद और तेज फैसले चर्चा का विषय बने।

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और परिक्रमा मार्ग में निभाई भूमिका

चित्रकूट में रहते हुए शुभ्रांत शुक्ला ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और परिक्रमा मार्ग जैसे महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने में निर्णायक भूमिका निभाई। उनकी कार्यशैली ने उन्हें विकासपरक सोच वाला प्रशासक सिद्ध किया।

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