International Airport Connectivity: जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी के लिए कितनी इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी है? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किन एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के भूमि अधिग्रहण में तेजी लाने के निर्देश दिए? उत्तर प्रदेश में 2030 तक कितने EV चार्जिंग स्टेशन विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है?

उत्तर प्रदेश में तेजी से बदलती आधारभूत संरचना की तस्वीर अब सिर्फ एक्सप्रेसवे और बड़े निवेश तक सीमित नहीं रही। सरकार अब आधुनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और औद्योगिक विकास को एक साथ जोड़कर नए विकास मॉडल पर काम करती दिखाई दे रही है। इसी कड़ी में जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एयरपोर्ट कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने के लिए शुरुआती चरण में 110 इलेक्ट्रिक बसें चलाने के निर्देश दिए हैं।

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बुधवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की चौथी बैठक में प्रदेश की कई बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा की गई। बैठक में जेवर एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, टेक्सटाइल पार्क और इलेक्ट्रिक वाहन इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

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जेवर एयरपोर्ट के लिए तैयार होगी आधुनिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन से पहले सरकार यात्रियों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा देने की तैयारी में जुट गई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 15 जून से प्रस्तावित उड़ान संचालन से पहले परिवहन व्यवस्था पूरी तरह मजबूत कर ली जाए। बैठक में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा क्षेत्र में 500 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की प्रगति की भी समीक्षा की गई। शुरुआती चरण में 110 इलेक्ट्रिक बसें जेवर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि यात्रियों को एयरपोर्ट तक सुगम और पर्यावरण अनुकूल यात्रा मिल सके।

इलेक्ट्रिक वाहनों और चार्जिंग नेटवर्क पर सरकार का फोकस

प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार बड़े स्तर पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही है। अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश में इस समय करीब 15.5 लाख इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हैं। सरकार ने वर्ष 2030 तक राज्यभर में 10 हजार चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल लगभग 2500 चार्जिंग स्टेशन चालू हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार तेजी से किया जाए ताकि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को और मजबूती मिल सके।

एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बेहतर सड़क और परिवहन कनेक्टिविटी से निवेश, उद्योग और रोजगार को नई गति मिलेगी। उन्होंने कई महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के भूमि अधिग्रहण कार्य को समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के लिए लगभग 55 प्रतिशत भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है। वहीं मुख्यमंत्री ने आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे और झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के लिए जून के अंत तक भूमि अधिग्रहण पूरा करने को कहा।

मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे को लेकर भी अहम जानकारी सामने आई। अधिकारियों ने बताया कि इसका एलाइनमेंट स्वीकृत हो चुका है और भूमि अधिग्रहण की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

निवेश और औद्योगिक परियोजनाओं पर भी जोर

बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि निवेश से जुड़ी परियोजनाओं में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को लंबित मामलों का जल्द निस्तारण करने और निवेशकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए। मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब परियोजना के लिए 323 हेक्टेयर में से 301 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा मिल चुका है। वहीं मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के लिए 200 हेक्टेयर में से 144 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध हो चुकी है।

सीड पार्क, टेक्सटाइल पार्क और डिफेंस कॉरिडोर पर फोकस

मुख्यमंत्री ने लखनऊ में प्रस्तावित सीड पार्क और टेक्सटाइल पार्क परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि इन्हें प्रदेश के कृषि और औद्योगिक विकास से जोड़कर तेजी से आगे बढ़ाया जाए। बैठक में बताया गया कि सीड पार्क परियोजना को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और प्रमुख बीज कंपनियों से चर्चा की गई है। वहीं डिफेंस कॉरिडोर परियोजना के तहत अलीगढ़ डिफेंस नोड में 125 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव भी सामने आया है। सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना है।

कृषि और मत्स्य निर्यात को भी मिलेगा बढ़ावा

जेवर एयरपोर्ट के पास प्रस्तावित एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट हब और उन्नाव की एक्वा ब्रिज परियोजना की भी समीक्षा की गई। सरकार कृषि और मत्स्य उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए आधुनिक प्रोसेसिंग और निर्यात सुविधाएं विकसित करने की तैयारी कर रही है। एग्री एक्सपोर्ट हब के लिए 50 एकड़ भूमि की जरूरत बताई गई है, जिसमें से 29 एकड़ भूमि चिन्हित हो चुकी है। वहीं उन्नाव में एक्वा ब्रिज परियोजना के लिए 60 एकड़ भूमि तय की गई है।

‘सीएम समीक्षा’ परियोजनाओं की होगी विशेष मॉनिटरिंग

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ‘सीएम समीक्षा’ में शामिल सभी प्रमुख परियोजनाओं की नियमित निगरानी के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष सेल बनाई जाए। उनका कहना था कि समयबद्ध मॉनिटरिंग से परियोजनाओं को तय समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इन परियोजनाओं को तय समय सीमा में पूरा करने में सफल रहती है, तो उत्तर प्रदेश में निवेश, रोजगार और परिवहन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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