कानपुर में आईटीबीपी जवान की मां के इलाज में कथित लापरवाही को लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय में बैठक हुई। अस्पताल की जांच रिपोर्ट पर सवाल उठने के बाद सीएमओ ने दोबारा जांच कराने की बात कही है। घेराव की खबरों को पुलिस ने गलत बताया।

कानपुर। कानपुर में शनिवार को पुलिस कमिश्नर कार्यालय के बाहर आईटीबीपी जवानों की मौजूदगी को लेकर उठे सवालों के बीच अब पूरे मामले की तस्वीर साफ हो गई है। जानकारी के अनुसार आईटीबीपी के जवान अपने साथी विकास सिंह की मां के इलाज में कथित लापरवाही और अस्पताल पर कार्रवाई न होने से नाराज थे। इसी मामले को लेकर आईटीबीपी के कमांडेंट गौरव प्रसाद पुलिस कमिश्नर से मुलाकात करने पहुंचे थे। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) भी शामिल हुए। पुलिस कमिश्नर, सीएमओ और आईटीबीपी अधिकारियों के बीच इस पूरे प्रकरण को लेकर लंबी चर्चा हुई। मामले में सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी से दोबारा स्पष्ट रिपोर्ट मांगी गई है।

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कमिश्नरेट घेराव की खबरों को पुलिस ने बताया गलत

एडिशनल पुलिस कमिश्नर (कानून-व्यवस्था) विपिन ताडा ने कमिश्नरेट परिसर के घेराव की खबरों को पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि आईटीबीपी का जवान अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत के लिए आया था, जबकि अन्य जवान बाहर मौजूद थे। उन्होंने बताया कि बातचीत के बाद जवानों को वापस भेज दिया गया था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूरे मामले की जांच तथ्यों के आधार पर की जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इलाज में लापरवाही के आरोप की दोबारा होगी जांच

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कुछ दिन पहले आईटीबीपी के जवान विकास सिंह ने आवेदन देकर आरोप लगाया था कि अस्पताल की लापरवाही के कारण उनकी मां का हाथ काटना पड़ा। मामला स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा होने के कारण आवेदन मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेजा गया था। इसके बाद डॉक्टरों की एक कमेटी बनाकर मामले की जांच कराई गई थी। हालांकि जांच रिपोर्ट पर विकास सिंह और आईटीबीपी अधिकारियों ने कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जताई थी। अब बातचीत के बाद सीएमओ और आईटीबीपी अधिकारी कुछ बिंदुओं पर दोबारा जांच कराने के लिए सहमत हो गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

ITBP कमांडेंट बोले- पुलिस से पूरा सहयोग मिल रहा

ITBP कानपुर के कमांडेंट गौरव प्रसाद ने कहा कि उनके जवान की मां की मेडिकल जांच रिपोर्ट को लेकर चर्चा के लिए पुलिस कमिश्नर से समय लिया गया था। इसी कारण अधिकारी और जवान वहां पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि वे खुद अंदर बैठक में मौजूद थे, जबकि जवान बाहर खड़े थे। संभवतः इसी स्थिति को गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कमिश्नरेट घेराव जैसी कोई घटना नहीं हुई और पुलिस प्रशासन की ओर से पूरा सहयोग मिल रहा है।

CMO ने कहा- कुछ बिंदुओं पर फिर होगी जांच

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी ने बताया कि जांच रिपोर्ट सही है, लेकिन बातचीत के दौरान जिन बिंदुओं पर सवाल उठे हैं, उनकी दोबारा जांच की जाएगी। इसके बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

क्या है पूरा मामला?

फतेहपुर जिले के अलीमऊ गांव निवासी विकास सिंह आईटीबीपी में कांस्टेबल हैं और वर्तमान में महाराजपुर आईटीबीपी कैंप में तैनात हैं। विकास सिंह के अनुसार उनकी मां निर्मला देवी (56) को सांस लेने में दिक्कत, कमजोरी और कब्ज की समस्या थी। सबसे पहले उन्हें आईटीबीपी अस्पताल महाराजपुर में दिखाया गया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें आईटीबीपी पैनल के एक निजी अस्पताल में रेफर किया गया। वहां इलाज के दौरान उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।

विकास सिंह का आरोप है कि इलाज के दौरान उनकी मां को गलत इंजेक्शन लगाया गया, जिसके बाद हाथ काला पड़ने लगा और सूजन बढ़ती गई। हालत बिगड़ने पर उन्हें बिठूर रोड स्थित दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों को उनका हाथ काटना पड़ा।