लखीमपुर हिंसा का मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा 278 दिन बाद जेल से आया बाहर, यूपी व दिल्ली से बाहर रहने की शर्त पर मिली जमानत

| Jan 28 2023, 01:10 AM IST

Ashish Mishra
लखीमपुर हिंसा का मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा 278 दिन बाद जेल से आया बाहर, यूपी व दिल्ली से बाहर रहने की शर्त पर मिली जमानत
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सार

लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर 2021 को आंदोलनकारी किसानों के ऊपर गाड़ी चढ़ाए जाने की घटना हुई थी। इस मामले का मुख्य आरोपी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी का बेटा आशीष मिश्रा उर्फ मोनू है।

Ashish Mishra released: किसान आंदोलन के दौरान हुए लखीमपुर हिंसा का मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा शुक्रवार को जेल से बाहर आ गया। आशीष को दो महीने की सशर्त जमानत मिली है। वह 278 दिन के बाद जेल से बाहर आया है। आशीष मिश्रा को बेहद गोपनीय तरीके से जेल से बाहर लाया गया। वह अपनी खुद की गाड़ी से जेल से बाहर निकला। बुधवार को उसे सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। आशीष मिश्रा, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी का बेटा है।

यूपी या दिल्ली से बाहर रहना होगा आशीष मिश्रा को...

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लखीमपुर हिंसा के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट ने इस शर्त पर जमानत दी है कि उसे जेल से बाहर उसी शर्त पर जाने दिया जाएगा जब वह यह यूपी व दिल्ली से बाहर रहेगा। शुक्रवार को जेल से बाहर आए आशीष मिश्रा को आदेश के अनुसार 7 दिन के अंदर आशीष मिश्रा को यूपी और दिल्ली छोड़ना होगा। उस पर लखीमपुर खीरी में अपनी जीप से आंदोलन कर रहे किसानों को कुचलकर मारने का आरोप है।

3 अक्टूबर 2021 में थार जीप से कुचल दिया था किसानों को...

लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर 2021 को आंदोलनकारी किसानों के ऊपर गाड़ी चढ़ाए जाने की घटना हुई थी। इस मामले का मुख्य आरोपी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी का बेटा आशीष मिश्रा उर्फ मोनू है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 10 फरवरी, 2022 को आशीष को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर दिया था।

14 मार्च को फिर होगी मामले की सुनवाई

25 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा को शर्तों के साथ रिहाई का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट 14 मार्च को फिर मामले पर सुनवाई करेगा। 14 मार्च को आज दिए गए आदेश कि समीक्षा की जाएगी। आशीष मिश्रा के वकील की तरफ से दलील दी गई थी कि वह 1 साल से अधिक समय जेल में बिता चुका है। आशीष के घटना में शामिल होने का कोई ठोस सबूत नहीं है। लखीमपुर खीरी की निचली अदालत के जज ने सुप्रीम कोर्ट को भेजी रिपोर्ट में बताया था कि केस का निपटारा होने में 5 साल तक का समय लग सकता है। आशीष को जमानत का संकेत देते हुए कोर्ट ने कहा था कि मुकदमा खत्म होने तक किसी को भी जेल में नहीं रखा जा सकता।

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