Amausi airport smuggling: बैंकॉक से आए दो यात्रियों से अमौसी एयरपोर्ट पर 15 करोड़ की हाइड्रोपोनिक कैनबिस बरामद। DRI ने तस्करों को धर दबोचा, एल्युमिनियम की परतों में छिपाया था नशा।

Lucknow airport drug bust: जहां एक ओर अमौसी एयरपोर्ट लखनऊ की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है, वहीं यह तस्करी के लिए भी तस्करों की पसंदीदा जगह बनता जा रहा है। इस बार बैंकॉक से आई उड़ान में छिपे थे करोड़ों के नशे के सामान, और ये छुपाए गए थे बड़ी ही चालाकी से, एल्युमिनियम की परतों में।

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डीआरआई का बड़ा खुलासा, बैंकॉक से आए दो तस्कर गिरफ्तार

राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) की टीम ने दस जून को अमौसी एयरपोर्ट पर बड़ा खुलासा किया। बैंकॉक से एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX-104 से पहुंचे दो भारतीय यात्रियों के पास से कुल 15.46 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक कैनबिस जब्त की गई। दोनों यात्रियों को मौके पर गिरफ्तार कर लिया गया है।

ऐसे छिपाई गई थी ड्रग्स: एल्युमिनियम की परतों में लिपटा था नशा

जांच के दौरान जब दोनों यात्रियों के बैग खोले गए तो टीम को शक हुआ। एक्स-रे स्कैन और मैनुअल चेकिंग के दौरान एल्युमिनियम की लेयर में लिपटे हुए वैक्यूम सील पैकेट बरामद किए गए। जब उन्हें खोला गया तो वह हाइड्रोपोनिक कैनबिस निकली — एक बेहद महंगी और खतरनाक सिंथेटिक ड्रग जो खासतौर पर रेव पार्टियों में इस्तेमाल होती है।

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15 करोड़ की नशीली खेप, हाई-टेक खेती से तैयार

पकड़ी गई हाइड्रोपोनिक ड्रग्स की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 15.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। बता दें, यह एक ऐसी नशीली पदार्थ है जिसे मिट्टी के बिना, सिर्फ पानी में उगाया जाता है। इसकी खेती और वितरण दोनों ही पूरी तरह अवैध हैं।

पहले भी हो चुके हैं कई बड़े ड्रग्स केस लखनऊ एयरपोर्ट पर

यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले अप्रैल 2025 में दुबई से आई उड़ान में युगांडा की महिला अनीताह नाबाफू वामुकूता को गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से लगभग 25 करोड़ रुपये की हाइड्रोपोनिक वीड बरामद की गई थी। वहीं मार्च में थाईलैंड से आई एक अन्य विदेशी महिला के पास भी इतनी ही कीमत की ड्रग्स पकड़ी गई थी।

लखनऊ एयरपोर्ट बना तस्करों का नया रूट?

लगातार हो रही इन घटनाओं से साफ है कि लखनऊ का चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट अब ड्रग्स तस्करों के लिए एक नया हब बनता जा रहा है। एयरपोर्ट सुरक्षा एजेंसियां अब और भी चौकन्नी हो गई हैं, लेकिन सवाल उठता है, क्या ये कार्रवाई पर्याप्त है या हमें सुरक्षा तंत्र को और सख्त बनाने की जरूरत है?

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