Prayagraj Flood News Today: प्रयागराज में गंगा-यमुना का जलस्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। दर्जनों इलाकों में बाढ़ का पानी घुस चुका है, मंदिर डूब गए हैं और एनडीआरएफ राहत कार्य में जुटी है। सरकार ने 11 मंत्रियों की टीम तैनात की है।

Prayagraj Flood 2025: उत्तर भारत में मॉनसून की दस्तक ने जहां कुछ राहत दी, वहीं उत्तर प्रदेश के कई जिलों में यह बारिश अब मुसीबत बन चुकी है। लगातार हो रही वर्षा और पहाड़ों से आ रहा अतिरिक्त पानी अब नदियों में तबाही बनकर बह रहा है। सबसे खतरनाक हालात प्रयागराज में देखने को मिल रहे हैं, जहां गंगा और यमुना न सिर्फ उफान पर हैं, बल्कि उन्होंने शहर के तमाम हिस्सों को अपने आगोश में ले लिया है।

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कहां-कहां बढ़ा खतरा? ये 17 जिले हैं बाढ़ की चपेट में

प्रदेश के 17 जिले इस समय बाढ़ से प्रभावित हैं। गंगा और यमुना का कहर प्रयागराज, वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर और बलिया सहित कई जिलों में देखने को मिल रहा है। गंगा किनारे बसे इलाके, सलोरी, राजापुर, दारागंज, बघाड़ा और तेलियरगंज- पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। प्रयागराज में हालात इतने गंभीर हैं कि सड़कों का अस्तित्व ही खत्म हो गया है, और लोग नावों या ट्रैक्टरों से आने-जाने को मजबूर हैं।

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संगम का बदलता दृश्य: जब हनुमानजी भी जल समाधि ले लें

प्रयागराज की पहचान रहे 'बड़े हनुमानजी' भी अब पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। केवल मंदिर की धर्मध्वजा पानी के ऊपर दिखाई दे रही है। संगम तट से लेकर शंकर विमान मंडप तक सब कुछ गंगा में समा गया है। रसूलाबाद घाट, कर्जन पुल, शंकर घाट, हर जगह पानी ही पानी है। यह दृश्य न सिर्फ चौंकाता है, बल्कि डराता भी है।

मकानों में घुसा पानी, ज़िंदगी छतों पर सिमटी

बाढ़ के कारण सैकड़ों घरों में पानी घुस गया है। कई मकान पूरी तरह डूब चुके हैं, जिनके पास दो मंज़िला मकान नहीं हैं, वे लोग अब स्कूलों, राहत शिविरों या रिश्तेदारों के घरों में शरण ले रहे हैं। जिनके पास ऊपरी मंज़िल है, वे वहीं रह रहे हैं, लेकिन जरूरी सामान, खाना और दवाइयों का संकट गहराता जा रहा है।

मदद के लिए मैदान में उतरीं NDRF की टीमें

बघाड़ा, दारागंज, सलोरी जैसे इलाकों में एनडीआरएफ की टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। घर-घर जाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। खाने-पीने की वस्तुएं और दवाइयां वितरित की जा रही हैं। प्रतियोगी छात्रों की भारी संख्या वाले इन इलाकों में अब पढ़ाई नहीं, ज़िंदगी बचाने की जद्दोजहद जारी है।

इंसानियत की मिसाल: कमर तक पानी में नवजात को लेकर चलती मां

बघाड़ा से आई एक तस्वीर ने हर किसी को झकझोर दिया। एक मां-पिता अपने नवजात बच्चे को कमर तक पानी में संभालते हुए सुरक्षित जगह ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे दृश्य न सिर्फ हालात की गंभीरता को दिखाते हैं, बल्कि मानव जुझारूपन और साहस की मिसाल भी बन जाते हैं।

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यमुना और केन का खतरा भी कम नहीं

गंगा के अलावा यमुना और उसकी सहायक नदियां भी कई जिलों में कहर बरपा रही हैं। आगरा, इटावा, औरैया, हमीरपुर, फतेहपुर, बांदा और चित्रकूट जैसे इलाकों में यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है। फतेहपुर में सड़कें डूब गई हैं और बिजली सप्लाई रोक दी गई है। बांदा में केन नदी का उफान भी परेशानी का कारण बन रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 11 मंत्रियों की टीम बनाई है जो अपने-अपने ज़िलों में जाकर राहत और बचाव कार्यों की निगरानी कर रही है। प्रयागराज और मिर्जापुर की जिम्मेदारी नंदगोपाल गुप्ता को दी गई है। हालांकि सवाल यह है कि क्या सरकार की तैयारी और संसाधन इस आपदा के सामने पर्याप्त हैं?

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