उमेश पाल हत्याकांड मामले में जांच के दौरान जेल के भीतर के कई हैरान करने वाले सच भी सामने आए हैं। माफिया अतीक के भाई अशरफ को जेल के भीतर तमाम तरह की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती थीं।

बरेली: जेल में अपराधियों की मौज को लेकर समय-समय पर सवाल खड़े होते रहे हैं। चित्रकूट जेल से भी बीते दिनों सामने आया कि किस तरह से नियमविरुद्ध अब्बास अंसारी और निखत की मुलाकात होती थी। वहीं इसके बाद मंगलवार 4 अप्रैल को भी यूपी के दो जेल अधिकारियों पर गाज गिराई गई। ज्ञात हो कि माफिया अतीक अहमद के भाई और पूर्व विधायक अशरफ के लिए जेल किसी होटल से कम नहीं थी। वह जेल में गुर्गों के साथ में दरबार लगाता था और उसके लिए पीलीभीत से स्पेशल बिरयानी मंगवाई जाती थी। जेल में उसकी पालतू बिल्ली का भी ख्याल रखा जाता था। माफिया का रसूख इतना था कि जेलकर्मी भी उसके विरोध की हिम्मत नहीं कर पाते थे।

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रिपोर्ट में खुल रहे कई राज

अशरफ की खातिरदारी के लिए जेल अधीक्षक राजीव शुक्ला के द्वारा तमाम नियम कायदों को ताक पर रख दिया गया था। इन तमाम चीजों को लेकर प्रभारी डीआईजी जेल आरएन पांडेय ने जांच के बाद रिपोर्ट डीजी जेल को भेजी थी। सूत्र बताते हैं कि इस रिपोर्ट में जेल के बड़े अधिकारियों से लेकर निचले स्तर के अधिकारियों तक को दोषी ठहराया गया था। इसमें राजीव शुक्ला को जिम्मेदार ठहराया गया। इस बीच कुछ कर्मचारी न चाहते हुए भी इस मामले का हिस्सा बने। विरोध की स्थिति में उनको खुद पर कार्रवाई का डर सता रहा था।

जेल तक बड़े आराम से पहुंचता था सारा सामान

अशरफ को जेल अधीक्षक की देखरेख में बैरक तक बिरयानी पहुंचाई जाती थी। अशरफ के लिए जेल की कैंटीन में भी मटन, चिकन और अंडा करी बनाई जाती थी। अशरफ के कहने पर ही बिल्लियों के खाने के लिए बिस्किट, दूध और ब्रेड आदि आता था। चहारदीवारी के भीतर अशरफ और उसके गुर्गों ने जेल के स्टाफ से लेकर उपद्रव करने वाले बंदियों तक को सेट कर लिया था। हर माह जेल के प्रमुख जिम्मेदारों को नजराना भी पहुंचाया जाता था। समय-समय पर जेल के भीतर ही दावत का इंतजाम भी किया जाता था। नवरात्र में फलाहार और रमजान में इफ्तार को लेकर भी खास इंतजाम किया जाता था। यह अन्य सामान जेल के सामान के साथ ही वहां पर पहुंचता था।

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