illegal conversions UP: कभी सड़कों पर अंगूठी बेचने वाला छांगुर बाबा आज करोड़ों की काली कमाई और सैकड़ों धर्मांतरण के मामलों का केंद्र है। यूपी एटीएस की जांच में उसके काले साम्राज्य का खुलासा हुआ है. 

Chhangur Baba conversion racket: कभी सड़कों पर अंगूठी और नग बेचने वाला शख्स आज करोड़ों की काली कमाई, विदेशी कनेक्शन और सैकड़ों धर्मांतरण के मामलों का केंद्र बन चुका है। नाम है जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा, जो अब अवैध धर्मांतरण रैकेट का सरगना माना जा रहा है। उसकी कहानी किसी अंडरवर्ल्ड माफिया स्क्रिप्ट से कम नहीं है, और यूपी एटीएस की जांच में जो सामने आया है, वो चौंकाने वाला है।

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तीन बीघा की कोठी, 70 कमरे और ‘स्पेशल टास्क फोर्स’

बलरामपुर के मधपुर गांव में फैली छांगुर बाबा की आलीशान कोठी किसी किले से कम नहीं थी।

  • 40 से 70 कमरों वाली यह कोठी तीन बीघा जमीन पर बनी थी
  • सीसीटीवी निगरानी, प्राइवेट पावर प्लांट, सोलर सिस्टम,
  • और विदेशी नस्ल के घोड़ों, कुत्तों और जर्सी गायों के लिए मार्बल से बना वीआईपी अस्तबल।

यही नहीं, बाबा ने अपने नेटवर्क को चलाने के लिए 50 युवकों की विशेष टास्क फोर्स तैयार की थी। इन ‘आध्यात्मिक सैनिकों’ को कोठी में ही रखा जाता था और हर सुविधा मुफ्त दी जाती थी। ये युवक बाबा के हर आदेश को अंतिम आदेश मानते थे।

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काले साम्राज्य का अड्डा बनी थी कोठी, सरकारी जमीन पर बना था हिस्सा

बाबा की कोठी ही उसका मुख्य ऑपरेशन हब थी, जहां से वह धर्मांतरण का नेटवर्क चला रहा था। जांच में सामने आया कि कोठी का एक हिस्सा सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया था। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए तीन दिन तक चले बुलडोजर अभियान में इसे ध्वस्त कर दिया।

‘बाबा’ की स्पेशल 50 टास्क फोर्स: ब्रेनवॉश से लेकर धमकियों तक

ATS को जांच में पता चला कि बाबा ने जिन 50 युवकों की फोर्स बनाई थी, उन्हें मानसिक और वैचारिक रूप से इस कदर प्रभावित किया गया था कि वे बिना सवाल हर आदेश का पालन करते थे।

  1. इन युवकों को ब्रेनवॉश कर धार्मिक कट्टरता सिखाई जाती थी
  2. बाबा खुद को सूफी संत बताता था और उन्हें "आध्यात्मिक सेवक" कहता था
  3. इस फोर्स का उपयोग न केवल धर्मांतरण, बल्कि स्थानीय भय और हिंसा फैलाने में भी किया जाता था

जाति आधारित ‘रेट कार्ड’ और प्रेमजाल: धर्मांतरण का खतरनाक फॉर्मूला

ATS की जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बाबा ने धर्मांतरण के लिए एक जाति आधारित रेट लिस्ट बनाई थी:

  • ब्राह्मण, क्षत्रिय और सिख लड़कियों के लिए: ₹15–16 लाख
  • पिछड़ी जातियों के लिए: ₹10–12 लाख
  • अन्य जातियों के लिए: ₹8–10 लाख

धन, नौकरी, शादी और विदेश भेजने के लालच से लोगों को फंसाया जाता था। प्रेमजाल और विवाह का वादा कर जबरन मतांतरण करवाया जाता था।

40 से अधिक बैंक खाते, 100 करोड़ का लेन-देन और विदेशी फंडिंग

ATS और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में सामने आया है कि छांगुर बाबा और उसके साथियों ने:

  1. 40+ बैंक खातों में 100 करोड़ से ज्यादा का लेन-देन किया
  2. खाड़ी देशों से फंडिंग मिली
  3. बाबा ने 40 से ज्यादा बार इस्लामिक देशों की यात्राएं कीं, जिससे उसके अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पुष्टि होती है

अब ED मनी लॉन्ड्रिंग और NIA टेरर फंडिंग के एंगल से जांच कर रही है।

कोडवर्ड से चलता था नेटवर्क: ‘मिट्टी पलटना’ मतलब धर्मांतरण

बाबा अपने साथियों से कोडवर्ड में बातचीत करता था:

  • ‘मिट्टी पलटना’ = धर्मांतरण
  • ‘प्रोजेक्ट’ = लड़कियां
  • ‘काजल करना’ = मानसिक रूप से प्रभावित करना
  • ‘दर्शन’ = बाबा से मिलाना

इसके जरिए नेटवर्क को गोपनीय और पुलिस से बचाकर संचालित किया जाता था। युवाओं को इस्लामी शिक्षण संस्थानों में मुफ्त पढ़ाई और विदेश में काम का सपना दिखाया जाता था।

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