उत्तर प्रदेश में भू-स्वामित्व नामांतरण और लैंड यूज़ चेंज की प्रक्रिया होगी आसान। योगी सरकार के डिजिटल सरलीकरण से भूमि से जुड़े काम होंगे तेज, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित। किसानों और निवेशकों को मिलेगी बड़ी राहत।

अब जमीन से जुड़े कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की मजबूरी धीरे-धीरे खत्म होने वाली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने भू-प्रशासन को पूरी तरह डिजिटल, सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। भू-स्वामित्व नामांतरण और लैंड यूज़ चेंज की जटिल प्रक्रियाओं को अब डिजिटल सरलीकरण के जरिए नागरिकों के लिए आसान किया जा रहा है। इससे किसानों, भू-मालिकों और निवेशकों को समय, पैसा और परेशानी, तीनों से राहत मिलेगी।

प्रदेश सरकार के स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग और राजस्व परिषद के संयुक्त प्रयास से नामांतरण की धारा-34 और लैंड यूज़ चेंज की धारा-80 की प्रक्रियाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है। राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र (एनआईसी) द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर के माध्यम से यह कार्य किया जाएगा, जिसे फरवरी 2026 तक पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य तय किया गया है।

धारा-34 के तहत नामांतरण प्रक्रिया होगी पूरी तरह डिजिटल

भूमि हस्तांतरण के बाद नामांतरण की प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑनलाइन की जा रही है। इसके तहत खसरा-खतौनी विवरण, मालिकाना हक से जुड़े प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी अभिलेख एक ही बार में ऑनलाइन अपलोड किए जाएंगे। डिजिटल डेटा फ्लो के जरिए दस्तावेजों की स्वतः जांच होगी, जिससे लेखपाल की आख्या और बार-बार आवेदन जमा करने की प्रक्रिया से छुटकारा मिलेगा। इससे नामांतरण की प्रक्रिया न केवल तेज होगी बल्कि पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जा सकेगी।

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धारा-80 के अंतर्गत लैंड यूज़ चेंज प्रक्रिया भी होगी आसान

कृषि भूमि को गैर-कृषि या औद्योगिक उपयोग में बदलने से संबंधित धारा-80 के तहत लैंड यूज़ चेंज प्रक्रिया को भी डिजिटल किया जा रहा है। पहले जहां आवेदन, जांच और स्वीकृति में महीनों का समय लगता था, अब यह प्रक्रिया ऑनलाइन आवेदन के जरिए सरल और तेज होगी। भूमि का मौजूदा उपयोग, खसरा-खतौनी और आसपास के क्षेत्र की जानकारी एक ही फॉर्म में ली जाएगी। अनावश्यक औपचारिकताओं को समाप्त कर डिजिटल जांच प्रणाली लागू की गई है।

एसएमएस और व्हाट्सएप से मिलेंगे नोटिस, सर्टिफिकेट होंगे ऑनलाइन

नामांतरण और लैंड यूज़ चेंज से जुड़े सभी नोटिस अब डाक के बजाय ऑनलाइन पोर्टल, एसएमएस या व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे जाएंगे। इससे आवेदकों को तुरंत सूचना मिल सकेगी। स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग के साथ एपीआई इंटीग्रेशन से डेटा का आदान-प्रदान और तेज होगा। आवेदन स्वीकृत होने के बाद नामांतरण प्रमाणपत्र और लैंड यूज़ चेंज सर्टिफिकेट भी कुछ ही दिनों में ऑनलाइन उपलब्ध हो जाएंगे।

निवेश और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

योगी सरकार की इस डिजिटल पहल से न केवल भूमि संबंधी मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि संपत्ति की खरीद-बिक्री में होने वाले फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा। लैंड यूज़ चेंज प्रक्रिया के सरल होने से ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस सोच को साकार करती है, जिसमें तकनीक के माध्यम से शासन को नागरिकों के और करीब लाने का संकल्प लिया गया है।

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