18 June weather warning: उत्तर प्रदेश में हुई बारिश से गर्मी से राहत मिली है। कई जिलों में भारी बारिश दर्ज की गई, जिससे तापमान में गिरावट आई है। हालांकि, आने वाले दिनों में और बारिश और वज्रपात की संभावना है।

UP monsoon rain 2025: उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों को आखिरकार राहत मिल गई है। सोमवार को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हल्की से लेकर तेज बारिश हुई, जिससे मौसम में अचानक बदलाव आया। इस बारिश से जहां तापमान में गिरावट दर्ज की गई, वहीं किसानों के लिए यह बारिश एक बड़ी राहत बनकर आई है। मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को बरेली में सबसे अधिक 149.4 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा सहारनपुर में 120 मिमी, गोंडा में 83 मिमी, लखीमपुर खीरी में 66.4 मिमी, और बस्ती में 56 मिमी बारिश रेकॉर्ड की गई। तराई और पूर्वांचल क्षेत्रों में बारिश का असर ज्यादा देखा गया।

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तापमान में 4 डिग्री तक गिरावट, हवा की रफ्तार और वज्रपात की संभावना

मौसम में आए बदलाव से तापमान में औसतन 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है, जो अगले तीन से चार दिनों में 3 से 7 डिग्री तकहो सकती है। मौसम विभाग ने यह भी बताया कि मंगलवार को भी बारिश का क्रम जारी रहेगा और 40 से 50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी, जिसके साथ गरज-चमक और वज्रपात की भी आशंका है। 

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18 और 19 जून को भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि 18 और 19 जून को प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। 

सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, देवरिया, गोरखपुर, संतकबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच में वज्रपात की संभावना जताई गई है।

धान और गन्ना किसानों के लिए राहत, सब्जियों को नुकसान की आशंका 

बारिश ने खास तौर पर उन किसानों को राहत दी है जो धान और गन्ने की बुआई का इंतजार कर रहे थे। प्रगतिशील किसान सर्वेश कुमार के अनुसार, अब खेतों में पर्याप्त नमी है और बुआई-रोपाई का कार्य शुरू किया जा सकता है। सिंचाई की जरूरत नहीं रहेगी।

हालांकि दूसरी ओर, आम, जामुन और सब्जियों की फसलों को तेज बारिश और हवा के कारण नुकसान पहुंचने की आशंका है। कई खेतों में जलभराव से फसलें सड़ने का खतरा भी है।

मानसून की पहली बारिश ने जहां प्रदेश में गर्मी से राहत दी है, वहीं मौसम विभाग की चेतावनियों को नज़रअंदाज़ करना खतरनाक हो सकता है। किसानों और आम नागरिकों को अगली कुछ दिनों तक सतर्क रहने की आवश्यकता है।

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