सीएम योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों को बच्चों को प्यार से पढ़ाने, ‘स्कूल चलो’ अभियान तेज करने और सकारात्मक सोच अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अच्छी शिक्षा से ही मजबूत समाज और राष्ट्र का निर्माण संभव है।
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षामित्र सम्मान समारोह में केवल मुख्य अतिथि ही नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक के रूप में भी नजर आए। उन्होंने शिक्षामित्रों को बच्चों के साथ बेहतर व्यवहार और शिक्षा के महत्व को समझाने के लिए कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि हर बच्चे के मन में पढ़ने की इच्छा पैदा करना अभिभावक, शिक्षक और समाज- तीनों की जिम्मेदारी है। शिक्षामित्र केवल पढ़ाने तक सीमित न रहें, बल्कि हर बच्चे को स्कूल तक लाने के लिए अभियान भी चलाएं। शिक्षक और शिक्षामित्र बच्चों की मजबूत नींव तैयार करने वाले कारीगर होते हैं।
बच्चों के साथ व्यवहार: मारपीट नहीं, प्यार से सिखाएं
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की मारपीट नहीं होनी चाहिए। पिटाई से बच्चे जिद्दी और डरपोक बन सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों को प्यार और समझदारी से पढ़ाएं। अच्छी कहानियां, कविताएं और प्रेरणादायक उदाहरणों के जरिए उन्हें सीखने के लिए प्रेरित करें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक अपने व्यक्तिगत तनाव या पारिवारिक समस्याएं स्कूल में न लाएं, ताकि बच्चों पर नकारात्मक असर न पड़े।
शिक्षा और भविष्य: जैसा सिखाएंगे, वैसा समाज बनेगा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज जो बच्चे स्कूल में पढ़ रहे हैं, वही आगे चलकर देश का भविष्य बनेंगे। अगर उन्हें सही दिशा मिलेगी तो वे अच्छे डॉक्टर, शिक्षक, किसान, अधिकारी और नेता बनेंगे। उन्होंने कहा कि नेता भी इसी समाज से निकलते हैं, इसलिए बच्चों को सही शिक्षा देना बहुत जरूरी है। उन्होंने सकारात्मक सोच के साथ काम करने पर जोर देते हुए कहा कि हर शिक्षामित्र में बेहतर परिणाम देने की क्षमता है।
280 बच्चों वाले स्कूल का उदाहरण
मुख्यमंत्री ने एक अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने एक स्कूल में 280 बच्चों की उपस्थिति देखी। उन्होंने कहा कि यह संख्या इस बात का संकेत है कि वहां अच्छा काम हो रहा है। जब शिक्षा का माहौल सकारात्मक होता है, तो बच्चों की संख्या अपने आप बढ़ती है। उन्होंने यह भी बताया कि वे पहले सांसद रहते हुए भी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों का दौरा करते थे और आज भी बच्चों से मिलना उन्हें पसंद है।
आंगनवाड़ी केंद्र का प्रेरणादायक अनुभव
सीएम योगी ने एक दिलचस्प घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक आंगनवाड़ी केंद्र में छोटे बच्चों को गाने के माध्यम से गिनती सिखाई जा रही थी- “एक-एक-एक मेरी नाक एक… दो-दो-दो मेरी आंखें दो…” जब उन्होंने बच्चों से पूछा, तो बच्चों ने तुरंत उसी तरीके से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे सरल और रचनात्मक तरीकों से बच्चों को आसानी से सिखाया जा सकता है।
स्वच्छता और यूनिफॉर्म: अभिभावकों की जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने शिक्षामित्रों से कहा कि वे अभिभावकों को भी जागरूक करें।
- बच्चे साफ-सुथरे कपड़ों में स्कूल आएं
- नियमित स्नान करके आएं
- सही यूनिफॉर्म और जूते-मोजे पहनें
उन्होंने बताया कि पहले कई बच्चे बिना जूते या चप्पल के स्कूल आते थे, लेकिन अब सरकार यूनिफॉर्म, जूते, मोजे और स्वेटर दे रही है। इसलिए अभिभावकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
‘स्कूल चलो’ अभियान: हर बच्चे तक पहुंचे शिक्षा
मुख्यमंत्री ने जुलाई में स्कूल खुलने से पहले “स्कूल चलो” अभियान को और तेज करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षक और शिक्षामित्र:
- स्कूल समय से पहले पहुंचें
- घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल लाने के लिए प्रेरित करें
- यह सुनिश्चित करें कि कोई बच्चा स्कूल समय में इधर-उधर न भटके
खेलकूद और शिक्षा: संतुलित विकास पर जोर
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को सलाह दी कि वे बच्चों के साथ खेलकूद में भी भाग लें। इससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि एक शिक्षित समाज ही मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र बना सकता है। इसी से विकसित भारत की नींव रखी जा सकती है।


