गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से मेरठ से प्रयागराज तक यात्रा आसान होगी। इससे हस्तिनापुर, कल्कि धाम, जैन सर्किट, महाभारत सर्किट और कई धार्मिक व इको-टूरिज्म स्थलों को बड़ा लाभ मिलेगा। प्रदेश में व्यापार और पर्यटन को भी गति मिलेगी।
लखनऊ। गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के साथ उत्तर प्रदेश में विकास, धार्मिक आस्था और पर्यटन को नई गति मिली है। मेरठ से प्रयागराज तक बना यह एक्सप्रेसवे सिर्फ एक आधुनिक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाला बड़ा आध्यात्मिक और आर्थिक कॉरिडोर बन गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में तैयार हुआ 594 किलोमीटर लंबा यह विश्वस्तरीय एक्सप्रेसवे पश्चिमी, मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश को तेज रफ्तार संपर्क से जोड़ रहा है। करीब 36,230 करोड़ रुपये की लागत से बने इस छह लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे से यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। अब मेरठ से प्रयागराज तक का सफर लगभग 6 घंटे में पूरा किया जा सकेगा।
इस परियोजना से धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। साथ ही व्यापार, निवेश, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
Hastinapur Tourism: गंगा एक्सप्रेसवे से हस्तिनापुर को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
गंगा एक्सप्रेसवे से सबसे अधिक लाभ पाने वाले क्षेत्रों में मेरठ जिले का हस्तिनापुर शामिल है। महाभारत काल से जुड़ा हस्तिनापुर जैन धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थल भी माना जाता है। यहां योगी सरकार 15 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से एकीकृत पर्यटन विकास परियोजना चला रही है। बेहतर सड़क संपर्क बनने से दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। हस्तिनापुर के पाण्डेश्वर महादेव मंदिर, करण मंदिर, उल्टा खेड़ा उत्खनन स्थल और हस्तिनापुर वन्यजीव अभ्यारण्य जैसे पर्यटन स्थलों को इस एक्सप्रेसवे से नई पहचान मिलेगी।
Sambhal Kalki Dham: संभल और धार्मिक स्थलों तक पहुंच होगी आसान
गंगा एक्सप्रेसवे से संभल क्षेत्र को भी बड़ा फायदा मिलने वाला है। यहां विकसित हो रहे कल्कि धाम और कुरुक्षेत्र तीर्थ स्थल तक पहुंच पहले से अधिक आसान हो जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि बेहतर कनेक्टिविटी के कारण धार्मिक पर्यटन को मजबूती मिलेगी और स्थानीय व्यापार को भी लाभ होगा।
Religious Tourism UP: कई प्रमुख मंदिर और तीर्थ स्थल होंगे सीधे कनेक्ट
यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के कई प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों को जोड़ने का काम करेगा। हापुड़ के ब्रजघाट गढ़मुक्तेश्वर, बुलंदशहर के अवंतिका देवी मंदिर, अमरोहा के वासुदेव मंदिर, बदायूं के श्रीरामचंद्र विराजमान मंदिर और शाहजहांपुर के परशुराम मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा बागपत के ऐतिहासिक लाक्षागृह स्थल के पर्यटन महत्व में भी वृद्धि होने की उम्मीद है।
Eco Tourism Uttar Pradesh: इको-टूरिज्म और प्राकृतिक स्थलों को भी बढ़ावा
गंगा एक्सप्रेसवे धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्राकृतिक और इको-टूरिज्म स्थलों को भी नई ऊर्जा देगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश में हरदोई के वनेश्वर महादेव मंदिर, उन्नाव के नवाबगंज इको-टूरिज्म क्षेत्र, रायबरेली के चामुंडा शक्तिपीठ, प्रतापगढ़ के मां ज्वाला देवी धाम और प्रयागराज के कई पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी। प्रयागराज ब्लैकबक रिजर्व जैसे पर्यावरण पर्यटन स्थलों तक बेहतर सड़क संपर्क बनने से पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
Ganga Expressway Route: मेरठ से प्रयागराज तक कई जिलों को जोड़ेगा कॉरिडोर
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे शुरू होने से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन आसान होगा। उन्होंने बताया कि यह एक्सप्रेसवे जैन सर्किट, महाभारत सर्किट और संभल के कल्कि धाम को नई पहचान देगा। साथ ही आसपास के इको-टूरिज्म स्थलों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के विकास का नया प्रतीक है। इसके शुरू होने के बाद मेरठ और प्रयागराज के बीच यात्रा समय 10-12 घंटे से घटकर लगभग 5-6 घंटे रह जाएगा। यह एक्सप्रेसवे मेरठ से शुरू होकर हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज तक पहुंचेगा।


