सीएम योगी आदित्यनाथ ने विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए। 6 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था, MSME, कृषि, डिजिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर विशेष जोर दिया गया।

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को ‘विकसित उत्तर प्रदेश @2047’ कार्ययोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि यह केवल एक विजन डॉक्यूमेंट नहीं, बल्कि प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और संरचनात्मक बदलाव का स्पष्ट रोडमैप है।

उन्होंने निर्देश दिए कि इसे व्यापक और सहभागी बनाते हुए 98 लाख से अधिक जन-सुझावों, विशेषज्ञों, उद्योग संगठनों और अन्य हितधारकों के सुझावों को शामिल किया जाए।

जनसहभागिता से बनेगा मजबूत विजन डॉक्यूमेंट

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विजन को सेक्टरवार अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक योजनाओं में विभाजित किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह दस्तावेज व्यवहारिक, परिणामोन्मुख और समयबद्ध होना चाहिए, जिससे 2047 तक उत्तर प्रदेश को विकसित राज्य बनाने का लक्ष्य पूरा किया जा सके।

2030, 2036 और 2047 के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि विजन डॉक्यूमेंट को 2030, 2036 और 2047 के लक्ष्यों में विभाजित किया जाए। सभी विभागों को त्रैमासिक और वार्षिक लक्ष्यों के अनुसार अपनी कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया, जिसमें जिम्मेदारी और अपेक्षित परिणाम स्पष्ट हों।

जिला स्तर तक लागू होगा ‘विजन 2047’

उन्होंने कहा कि राज्य स्तर के विजन को जिला, शहर और पंचायत स्तर तक लागू किया जाए। इसके लिए ‘जिला विजन 2047’ तैयार किया जाएगा, ताकि स्थानीय जरूरतों और संसाधनों के अनुसार विकास योजनाएं बनाई जा सकें।

अर्थशक्ति, जनशक्ति और जीवनशक्ति पर आधारित विकास मॉडल

मुख्यमंत्री ने बताया कि विकसित उत्तर प्रदेश का आधार तीन प्रमुख स्तंभों- अर्थशक्ति, जनशक्ति और जीवनशक्ति पर टिका है। इनके तहत कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र, बुनियादी ढांचा, सामाजिक क्षेत्र और सुशासन को एक साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और डायनामिक योजना पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्ययोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए रीयल-टाइम डैशबोर्ड के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दस्तावेज स्थिर नहीं बल्कि डायनामिक और एक्शन-ओरिएंटेड होना चाहिए।

6 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य

बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश ने 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर और 2036 तक 2 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए लगभग 16 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर आवश्यक मानी गई है। वर्तमान में राज्य की अर्थव्यवस्था लगभग 356 बिलियन डॉलर है और देश की जीडीपी में इसका योगदान 9 प्रतिशत से अधिक है।

कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र में संतुलित विकास

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र में संतुलित और उच्च उत्पादकता आधारित विकास जरूरी है। कृषि क्षेत्र में स्मार्ट खेती, वैल्यू चेन, निर्यात आधारित उत्पादन और डिजिटल प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। साथ ही पशुपालन और मत्स्य पालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बताते हुए इनके विकास पर जोर दिया गया।

MSME और औद्योगिक विकास पर विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को टेक्नोलॉजी आधारित और निर्यातोन्मुख विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। बैठक में बताया गया कि राज्य के मैन्युफैक्चरिंग GVA में MSME का योगदान करीब 46 प्रतिशत है। निवेश को बढ़ावा देने के लिए 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू साइन किए जा चुके हैं।

डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने सेवा क्षेत्र को विकास का प्रमुख इंजन बताते हुए आईटी, आईटीईएस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पर्यटन और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को ज्ञान और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और कौशल विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।

जनसंख्या और शहरीकरण से मिलेगा विकास को बल

बैठक में बताया गया कि 24 करोड़ की जनसंख्या के साथ उत्तर प्रदेश एक बड़ा उपभोक्ता बाजार है। अनुमान है कि 2047 तक शहरीकरण दर 60 प्रतिशत से अधिक हो जाएगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।

इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक कॉरिडोर के जरिए कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाए। इससे निवेश और रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे।

समावेशी विकास के साथ ‘विकसित भारत’ की ओर कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘विकसित उत्तर प्रदेश @2047’ केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समावेशिता और जीवन की गुणवत्ता सुधार का भी अभियान है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यह दस्तावेज प्रदेश को विकसित भारत के लक्ष्य में अग्रणी बनाए।