मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शीतकालीन सत्र में कुंदरकी की जीत को सनातन की जीत बताया और संभल की घटना पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करने की बात कही।

लखनऊ, 16 दिसंबर | मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शीतकालीन सत्र में कहा कि कुंदरकी की जीत सनातन की जीत है। यह भारत की वास्तविक जीत है। कुंदरकी, कटेहरी, खैर, मझवा, गाजियाबाद, मीरापुर, फूलपुर की जीत भारत के संविधान की जीत है। आप सबको कटघरे में खड़ा करते हैं।

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भारत अकेला देश, जहां बहुसंख्यक समाज विशेष अधिकार की नहीं, समान नागरिक कानून की बात करता है

सीएम ने पूछा कि विपक्ष आखिर मानता किसे है। एक तरफ विपक्ष ने सर्वे के बारे में माननीय उच्चतम न्यायालय की बात का स्वागत किया। दूसरी तरफ माननीय उच्चतम न्यायालय बार-बार समान नागरिक कानून को लागू करने की बात कहता है। भारत अकेला देश है, जहां बहुसंख्यक समाज अपने लिए विशेष अधिकार की नहीं, बल्कि समान नागरिक कानून की मांग कर रहा है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश ने समान नागरिक कानून की वकालत की तो विपक्ष ने उनके खिलाफ राज्यसभा में महाभियोग का नोटिस दे दिया, जो आपके दोहरे चरित्र को प्रदर्शित करता है। उच्चतम न्यायालय द्वारा सर्वे पर रोक लगाने और बुलडोजर की कार्रवाई पर दी गई गाइडलाइन का यह लोग स्वागत कर रहे हैं। उप्र अकेला राज्य है, जिसने बुलडोजर की कार्रवाई को अक्षरशः सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार अंजाम दिया है। सपा व कांग्रेस के लोग माननीय न्यायाधीश के खिलाफ राज्यसभा में महाभियोग की नोटिस देकर सच का मुंह जबर्दस्ती बंद करना चाहते हैं।

यह लोग गन प्वाइंट पर संवैधानिक संस्थाओं से अपनी बात मनवाना चाहते हैं

सीएम योगी ने कहा कि राज्यसभा के सभापति (उपराष्ट्रपति) के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव की नोटिस इसलिए दे दी गई, क्योंकि उन्होंने सदन के सकुशल संचालन के लिए सभी पक्षों से कहा था। सभापति व चेयरपर्सन के रूप में उनकी यही जिम्मेदारी है, लेकिन किसान पुत्र कैसे इतनी बड़ी कुर्सी पर पहुंच गया, यह इन लोगों को अच्छा नहीं लग रहा है। चुनाव के दौरान चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा किया गया यानी यह लोग संवैधानिक संस्थाओं से गन पॉइंट पर अपनी बातों को मनवाना चाहते हैं। यह चरित्र स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। हमें संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना होगा और इसे मजबूत बनाना होगा।

न्यायहित, समाजहित, राष्ट्रहित में शासन-प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन करना चाहिए

सीएम ने कहा कि न्यायहित, समाजहित, राष्ट्रहित व भविष्य हित में शासन-प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन करना चाहिए। बहराइच व संभल की घटना में प्रशासन की कार्रवाई न्यायसंगत तरीके से बढ़ रही है। संभल की घटना में ज्यूडिशियल कमीशन गठित किया गया है। इसके सदस्य लगातार विजिट कर रहे हैं। लोगों के बयान लेंगे, सबकी बात सुनेंगे और सच को सामने लेकर आएंगे, लेकिन आपके अनावश्यक पत्थऱबाजी, अवैध असलहे से फायर करने से वहां शांति बहाल नहीं होने वाली है।

वहीँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षियों की खिंचाई करते हुए कहा कि हम सोच रहे थे कि मिनी स्टेशन पॉवर कॉरपोरेशन चला रहा है, लेकिन संभल में धार्मिक स्थल से बिजली के मिनी स्टेशन संचालित हो रहे हैं। वहां कई मस्जिद ऐसी पाई गईं, जहां अवैध सब स्टेशन बनाकर फ्री में कनेक्शन बांटे गए थे। प्रदेश में पावर कॉरपोरेशन का लाइनलॉस 30 से कम है, लेकिन संभल के दीपासराय व मीरासराय मोहल्ले में लाइन लॉस 78 व 82 फीसदी है। यह देश के संसाधनों पर लूट है। प्रशासन कर्तव्य का निर्वहन कर रहा है तो उसे चोर कहेंगे और यदि प्रशासन चोरी पकड़ ले तो कहेंगे कि अत्याचार है।

जो बराबरी नहीं कर सकते, वे बुराई करते हैं

सीएम ने कहा कि सच्चाई सबके सामने आती है तो बुरा लगता है। जो बराबरी नहीं कर सकते, वे बुराई करते हैं। आप (विपक्ष) भी यही बुराई कर रहे हैं। आपकी बुराई में सत्य, न्याय नहीं झलकता। यह पक्षपातपूर्ण है। इससे लोकतंत्र की व्यवस्था कमजोर होती है। किसी भी मुस्लिम, अन्य मत-मजहब के त्योहारों के दौरान समस्या नहीं होती तो हिंदू पर्व के दौरान यदि किसी ने समस्या खड़ी की तो सरकार सख्ती से निपटेगी।

आखिर 22 कुओं को किसने पाट दिया

सीएम ने कहा कि माननीय न्यायालय के आदेश का पालन करना प्रशासन का दायित्व है। प्रशासन संभल में वही कर रहा है। सीएम ने कटाक्ष करते हुए सपा सदस्यों से कहा कि मंदिर को न छेड़कर आपने बड़ी कृपा कर दी, लेकिन 22 कुओं को किसने पाट दिया। आखिर मूर्तियां कैसे मिल रही हैं। नोटिस से परेशानी क्यों हो रही है।

शफीकुर्रहमान बर्क खुद को भारत का नागरिक नहीं, बाबर का संतान कहते थे

सीएम योगी ने कहा कि संभल में तुर्क व पठान का विवाद चल रहा है। शफीकुर्रहमान बर्क (सपा के पूर्व सांसद-अब स्मृतिशेष) खुद को भारत का नागरिक नहीं, बल्कि बाबर का संतान कहते थे। आपको तय करना है कि आक्रांताओं को अपना आदर्श मानते हैं या राम-कृष्ण, बुद्ध की परंपरा को। भारत में राम-कृष्ण व बुद्ध की परंपरा ही रहेगी, बाबर और औरंगजेब की परंपरा नहीं रहेगी।

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