Panch Takht Yatra Yojana: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'बौद्ध तीर्थ दर्शन योजना' और 'पंच तख्त यात्रा योजना' शुरू की है। इन योजनाओं के तहत श्रद्धालुओं को ₹10,000 का अनुदान मिलेगा, जिससे वे देशभर के तीर्थस्थलों की यात्रा कर सकेंगे।

Buddhist pilgrimage scheme Uttar Pradesh: लंबे समय से बौद्ध और सिख धर्मावलंबियों के लिए किसी विशेष तीर्थ यात्रा योजना का इंतज़ार कर रहे श्रद्धालुओं के लिए अब खुशखबरी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में दो नई तीर्थ यात्रा योजनाएं शुरू करने के निर्देश दिए हैं, ‘बौद्ध तीर्थ दर्शन योजना’ और ‘पंच तख्त यात्रा योजना’। इन दोनों योजनाओं के अंतर्गत श्रद्धालुओं को प्रति व्यक्ति ₹10,000 का अनुदानमिलेगा।

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तीर्थ यात्रा को मिलेगा सरकारी सहयोग

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि तीर्थ यात्रा भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, और सरकार का दायित्व है कि वह आस्था से जुड़ी इस परंपरा को मजबूती दे। इन दोनों योजनाओं को IRCTC के सहयोग से संचालित किया जाएगा, ताकि यात्रा का संचालन सुनियोजित और सुरक्षित तरीके से हो।

बौद्ध तीर्थ दर्शन योजना: भिक्षुओं को प्राथमिकता

‘बौद्ध तीर्थ दर्शन योजना’ के तहत उत्तर प्रदेश के बौद्ध और हिन्दू श्रद्धालु देशभर में स्थित बौद्ध तीर्थ स्थलों की यात्रा कर सकेंगे।मुख्यमंत्री योगी ने यह भी निर्देश दिया कि लाभार्थियों के चयन में बौद्ध भिक्षुओं को प्राथमिकता दी जाए, जिससे वह भी आत्मिक और धार्मिक यात्रा में सहभागी बन सकें।

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पंच तख्त यात्रा योजना: सिख आस्था के पांच पवित्र स्थल

‘पंच तख्त यात्रा योजना’ के माध्यम से यूपी के सिख श्रद्धालु देश के पांच प्रमुख 'तख्त साहिब' स्थलों की यात्रा कर सकेंगे:

  1. श्री अकाल तख्त साहिब, अमृतसर (पंजाब)
  2. श्री आनंदपुर साहिब, पंजाब
  3. श्री दमदमा साहिब, तलवंडी साबो (पंजाब)
  4. श्री हरमंदिर जी साहिब (पटना साहिब), बिहार
  5. श्री तख्त सचखंड हजूर साहिब, नांदेड़ (महाराष्ट्र)

डिजिटल और पारदर्शी प्रक्रिया पर जोर

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन योजनाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। चयन में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को वरीयतादी जाएगी और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रखी जाएगी।

इन योजनाओं से ना सिर्फ धार्मिक आस्था को बल मिलेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की धार्मिक सहिष्णुता, समावेशी विकास और पर्यटन को भी नया आयाम मिलेगा। यह ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मूर्त रूप देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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