Yogi Government Scheme: योगी सरकार ने कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों में दिव्यांगजनों के लिए 5% आरक्षण लागू किया है। साथ ही एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को विशेष प्राथमिकता देने का फैसला लिया गया है, ताकि उन्हें रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर मिल सकें।
योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में कौशल विकास को लेकर एक बड़ा और संवेदनशील कदम उठाया है। अब प्रदेश में चलने वाले सभी अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों में दिव्यांगजनों के लिए 5 प्रतिशत सीटें अनिवार्य रूप से आरक्षित होंगी। इसके साथ ही एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को प्रशिक्षण और पंजीकरण में विशेष प्राथमिकता देने का फैसला लिया गया है। सरकार का कहना है कि यह पहल केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के वंचित और विशेष जरूरत वाले वर्गों को सम्मान और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का प्रयास भी है।

हर प्रशिक्षण बैच में दिव्यांगजनों के लिए 5% सीटें आरक्षित
Uttar Pradesh Skill Development Mission के तहत संचालित सभी शॉर्ट टर्म स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम्स में अब प्रत्येक बैच में 5 फीसदी सीटें दिव्यांगजनों के लिए सुरक्षित रखी जाएंगी। प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि यह फैसला दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों के तहत लिया गया है।
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एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को मिलेगी विशेष प्राथमिकता
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एसिड अटैक पीड़ितों को दिव्यांग श्रेणी में शामिल किए जाने के कारण उन्हें कौशल प्रशिक्षण योजनाओं में प्राथमिकता दी जाएगी। यदि कोई एसिड अटैक पीड़ित महिला प्रशिक्षण के लिए पात्र और इच्छुक है, तो उसका पंजीकरण प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि कौशल प्रशिक्षण इन महिलाओं के लिए केवल नौकरी का साधन नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और नई पहचान देने का माध्यम भी बन सकता है।
सभी जिलों को जारी हुए निर्देश
मिशन निदेशक पुलकित खरे की पहल पर प्रदेश के सभी जिलों की जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों (DPMU) को इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में बनने वाले सभी प्रशिक्षण बैचों में आरक्षित सीटों पर पात्र लाभार्थियों का चयन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
महिला कल्याण विभाग के साथ होगा समन्वय
योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए महिला कल्याण विभाग और बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के जिला प्रोबेशन अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसका उद्देश्य जनपदवार एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं का डेटा तैयार करना और अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाओं को योजना से जोड़ना है।
सरकार का फोकस: रोजगार के साथ सम्मान
राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि कौशल विकास का उद्देश्य सिर्फ रोजगार देना नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की ओर आगे बढ़ाना है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है तो दिव्यांगजन और एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं के लिए रोजगार और सामाजिक भागीदारी के नए अवसर खुल सकते हैं।
सामाजिक समावेशन की दिशा में बड़ा कदम
उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल सामाजिक समावेशन और समान अवसर की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लंबे समय से दिव्यांगजनों और एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं के लिए रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर सीमित रहे हैं। ऐसे में कौशल विकास मिशन के जरिए उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश को सामाजिक दृष्टि से भी अहम कदम माना जा रहा है। सरकार ने सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों से निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच सके।
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