Abhivyanjana 5.0: नैनीताल के कालाढूंगी में आयोजित अभिव्यंजना 5.0 वार्षिक अधिवेशन में देशभर के सैकड़ों कवि और साहित्यकार जुटे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कुमार विश्वास समेत कई दिग्गजों ने साहित्य, संस्कृति और युवा पीढ़ी की भूमिका पर अपने विचार रखे।
Nainital Abhivyanjana 5.0 Annual Convention: प्रकृति की हरी-भरी गोद और हिमालय की तलहटी में बसा ऐतिहासिक कस्बा कालाढूंगी उस समय देश की साहित्यिक चेतना का केंद्र बन गया, जब यहां 'अभिव्यंजना 5.0' के वार्षिक अधिवेशन का शंखनाद हुआ। ललित फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस तीन दिवसीय महाकुंभ में देश के कोने-कोने से आए 400 से अधिक दिग्गज कवियों, लेखकों और युवा रचनाकारों ने शिरकत की। इस महोत्सव ने न केवल शब्दों की शक्ति को रेखांकित किया, बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया कि जब देवभूमि की आध्यात्मिक ऊर्जा और साहित्य का मिलन होता है, तो राष्ट्र की आत्मा जागृत हो उठती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की शिरकत, कवियों को बताया समाज के मार्गदर्शक
अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे उत्तराखंड के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री बेहद भावुक और सहज नजर आए। उन्होंने कवियों को समाज का आईना बताते हुए कहा, 'कवि केवल शब्दों के निर्माता नहीं होते, बल्कि वे समाज के चिंतक, मार्गदर्शक और प्रेरक होते हैं। जब-जब समाज उलझनों में घिरता है, तब कवि अपनी लेखनी से सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करते हैं। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को भी हमारे रचनाकारों की कविताओं ने ही गति दी थी।'
कुमार विश्वास संग साझा किए भावुक संस्मरण
मुख्यमंत्री ने विख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास के साथ अपने ढाई दशक पुराने संबंधों को याद किया। उन्होंने देहरादून के एक पुराने वाकये का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे देश के शहीदों पर आयोजित एक कार्यक्रम में कुमार विश्वास के काव्य पाठ को सुनकर उनकी आंखों में आंसू आ गए थे और कुमार विश्वास ने उन्हें बड़े भाई की तरह गले लगा लिया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुमार जी का आदेश उनके लिए हमेशा सहर्ष स्वीकार्य रहता है।
दिग्गज रचनाकार जुटे, ओज, हास्य और चेतना का संगम
मंच पर साहित्य जगत की तीन पीढ़ियों का अद्भुत संयोजन देखने को मिला। पद्मश्री डॉ. अशोक चक्रधर ने अपनी विशिष्ट शैली में हास्य-व्यंग्य की फुहारों के साथ सामाजिक सरोकारों पर तीखा प्रहार किया। डॉ. हरिओम पवार ने अपनी चिर-परिचित ओजस्वी शैली में जब उन्होंने राष्ट्रभक्ति और जनचेतना की कविताएं पढ़ीं, तो पूरा पंडाल 'भारत माता की जय' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। वहीं, डॉ. कुमार विश्वास ने अपनी मधुर आवाज और अनूठी प्रस्तुति से न केवल प्रेम का रंग बिखेरा, बल्कि युवा पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने के इस अनुष्ठान का नेतृत्व भी किया। अधिवेशन में देवभूमि के महान साहित्यकारों जैसे सुमित्रानंदन पंत, चंद्रकुंवर बर्त्वाल, शैलेश मटियानी और गौरा पंत 'शिवानी' के अवदानों को भी याद किया गया।
डॉ. कुमार विश्वास की मांग, कालाढूंगी में बने 'पंत साहित्य निवास'
मंच से डॉ. कुमार विश्वास ने मुख्यमंत्री के समक्ष देशभर से आए कवियों और नवोदित प्रतिभाओं की ओर से एक बेहद महत्वपूर्ण और अनूठी मांग रखी। उन्होंने कहा कि देश-विदेश के शोर-शराबे और प्रदूषण से दूर, उत्तराखंड की इस शांत आध्यात्मिक चेतना वाली भूमि पर कवियों के लिए एक एकांत साधना स्थली होनी चाहिए। कुमार विश्वास ने मंच से घोषणा की, 'अगर उत्तराखंड सरकार कालाढूंगी या देवभूमि के किसी शांत अंचल में कवियों के ठहरने और लिखने के लिए भूमि आवंटित करती है, तो मैं स्वयं अपनी जेब से ₹1 करोड़ की सहयोग राशि इस साहित्य निवास के निर्माण के लिए देता हूं। इसका नाम हम प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत के नाम पर 'पंत निवास' या 'प्रकृति निवास' रखेंगे, जहां हमारी नई पीढ़ी के बच्चे आकर एकांत में साहित्य सृजन कर सकें।' मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव पर बेहद सकारात्मक रुख दिखाते हुए इस पर विचार करने और भूमि तलाशने का भरोसा दिया।
दिवंगत युवा कवि को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
साहित्य के इस उत्सव के बीच एक बेहद गमगीन क्षण भी आया। कार्यक्रम की शुरुआत में ही मध्य भारत के एक अत्यंत होनहार और संभावनाओं से भरे युवा कवि पीयूष के आकस्मिक सड़क दुर्घटना में निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया गया। कुमार विश्वास और मुख्यमंत्री धामी सहित पूरे सदन ने मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी और कहा कि यह क्षति अपूरणीय है, परंतु पूरा कवि कुल उस शोक संतप्त परिवार के साथ खड़ा है।
नई पीढ़ी को मंच और सम्मान
'अभिव्यंजना 5.0' की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि यहां सिर्फ स्थापित नाम ही नहीं थे, बल्कि सोशल मीडिया के दौर में देश की भाषाई संस्कृति को बचाए रखने वाले सैकड़ों युवा लड़के-लड़कियों को भी आमंत्रित किया गया था। इस वर्ष का प्रतिष्ठित 'अभिव्यंजना सम्मान' भी उन विशिष्ट विभूतियों को प्रदान किया गया जिन्होंने समाज और साहित्य के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की नींव रखी है। रात के घने अंधेरे और ठंडी हवाओं के बीच, कालाढूंगी का यह मंच देश की भाषाई एकता, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और साहित्यिक वैभव का गवाह बना, जिसकी गूंज आने वाले कई वर्षों तक हिंदी जगत में सुनाई देती रहेगी। अभिव्यंजना 5.0 वार्षिक अधिवेशन से जुड़ी पूरी जानकारी, मंच से दिए गए प्रमुख वक्तव्यों, सम्मान समारोह और कवि सम्मेलन की विस्तृत झलक देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

