कारगिल विजय दिवस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी और परमवीर चक्र विजेताओं की अनुग्रह राशि 1.5 करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को देहरादून के गांधी पार्क स्थित शहीद स्मारक पहुंचकर कारगिल विजय दिवस (शौर्य दिवस) के अवसर पर कारगिल के अमर शहीदों को पुष्पचक्र अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने कारगिल शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया और उनके अद्वितीय साहस, त्याग तथा राष्ट्रसेवा को नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि डेढ़ करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये की जाएगी।

कारगिल विजय भारतीय सेना के साहस और बलिदान का अमर अध्याय

मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल विजय भारतीय सेना के अदम्य साहस, अटूट मनोबल और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 18 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर बेहद कठिन परिस्थितियों में भारतीय सैनिकों ने जिस वीरता का परिचय दिया, उसने पूरी दुनिया के सामने भारत की सैन्य क्षमता और दृढ़ संकल्प को साबित किया।

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कारगिल युद्ध में उत्तराखंड के 75 वीर सपूतों ने दिया सर्वोच्च बलिदान

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में देश के 527 जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। इनमें उत्तराखंड के 75 वीर सैनिक भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि भी है। यहां की गौरवशाली सैन्य परंपरा, वीरता पदक विजेताओं की विरासत और युवाओं का देश सेवा के प्रति समर्पण पूरे देश के लिए प्रेरणा है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मजबूत हुई देश की सुरक्षा नीति

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सुरक्षा नीति पहले से अधिक मजबूत, निर्णायक और आत्मविश्वासी बनी है। आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई, सीमावर्ती क्षेत्रों में तेजी से हो रहा बुनियादी ढांचे का विकास और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में उठाए गए कदम इसकी मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि वन रैंक-वन पेंशन, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और सैनिक कल्याण से जुड़े कई ऐतिहासिक फैसलों ने सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों का सम्मान बढ़ाया है।

सैनिकों और शहीद परिवारों के लिए राज्य सरकार की कई बड़ी योजनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों के कल्याण के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि शहीदों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की जा चुकी है। इसके अलावा सभी वीरता पुरस्कार विजेताओं को मिलने वाली एकमुश्त और वार्षिक सहायता राशि में भी ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है।

शहीद परिवारों, वीरता पुरस्कार विजेताओं और पूर्व सैनिकों को मिल रही विशेष सुविधाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि राज्य सरकार ने शहीद परिवारों के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजन की व्यवस्था की है। आवेदन की समय-सीमा भी दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है। इसके अलावा शहीद परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए आर्थिक सहायता, वीरता पुरस्कार विजेताओं को उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा, सेवारत और पूर्व सैनिकों को संपत्ति खरीदने पर स्टाम्प शुल्क में छूट जैसी कई सुविधाएं दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों के शस्त्र लाइसेंस की प्रक्रिया को भी आसान बनाया जा रहा है। साथ ही जिला अदालतों में सैनिकों और पूर्व सैनिकों की भूमि धोखाधड़ी से जुड़े लंबित मामलों का जल्द निस्तारण कराने के प्रयास किए जाएंगे।

सैन्य धाम निर्माण अंतिम चरण में, बनेगा राष्ट्रभक्ति का प्रतीक

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून के गुनियाल गांव में उत्तराखंड के पांचवें धाम 'सैन्य धाम' का निर्माण अंतिम चरण में है। उन्होंने बताया कि राज्य के प्रत्येक शहीद के घर से लाई गई पवित्र मिट्टी से तैयार हो रहा यह सैन्य धाम आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति, त्याग और बलिदान की प्रेरणा देगा।

अग्निवीरों के भविष्य के लिए बनेगा देश का पहला रोजगार सेल

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सेवामुक्त अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में देश का पहला 'अग्निवीर रोजगार सेल' बनाया जा रहा है। इसके साथ ही उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग और अन्य सरकारी सेवाओं में अग्निवीरों को प्राथमिकता देने, कौशल विकास प्रशिक्षण, स्वरोजगार, होमस्टे योजना और सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

विकसित उत्तराखंड के निर्माण में योगदान देने का आह्वान

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे कारगिल के अमर शहीदों के त्याग और शौर्य से प्रेरणा लेकर विकसित भारत और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि कारगिल के वीरों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को हमेशा राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा।

सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने भी दी श्रद्धांजलि

सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, पराक्रम और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अद्वितीय वीरता दिखाई।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों के हित में लगातार फैसले ले रही है। वीरता पुरस्कार विजेताओं की सम्मान राशि बढ़ाई गई है और अब तक 28 शहीदों के आश्रितों को सरकारी सेवा में समायोजित किया जा चुका है।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, दायित्वधारी सुभाष बड़थ्वाल, सैनिक कल्याण विभाग के सचिव युगल किशोर पंत, मेजर जनरल सम्मी सबरवाल (सेवानिवृत्त), जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान, एसएसपी प्रमेन्द्र डोभाल, पूर्व सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक तथा कारगिल शहीदों के परिजन सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।