Uttarakhand News: क्या कौशल विकास से उत्तराखंड के गांवों में रोजगार बढ़ेगा? क्या युवाओं का पलायन कम हो सकेगा? क्या स्थानीय उद्यमिता को नया बल मिलेगा? क्या विभागों के बेहतर समन्वय से योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचेगा? नाबार्ड की कार्यशाला में ग्रामीण आजीविका, कौशल विकास और रोजगार सृजन पर महत्वपूर्ण रणनीतियों पर चर्चा हुई।
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने शुक्रवार को देहरादून में वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली क्षेत्रीय सलाहकार समिति (आरएसी) बैठक के साथ एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय आजीविका से जुड़े कौशल अंतराल को कम करना और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों को मजबूत बनाना था।

कार्यशाला का विषय 'ग्रामीण उत्तराखंड में स्थानीय आजीविका के लिए कौशल अंतराल को घटाना: उद्यम प्रोत्साहन और पलायन में कमी हेतु जिला-स्तरीय रणनीतियां' रखा गया था।
नाबार्ड कार्यालय में हुआ आयोजन, कई विभागों की सहभागिता
देहरादून स्थित आईटी पार्क में नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक पंकज यादव ने की। कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी विभागों, वित्तीय संस्थानों और विकास संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक में एसएलबीसी, यूकेएसआरएलएम, केवीआईसी, केवीआईबी, कृषि एवं उद्यान विभाग, उत्तराखंड ग्रामीण बैंक, यूकेएसटीसीबी, ग्रामीण विकास विभाग तथा विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के प्रतिनिधि शामिल हुए। वहीं, केवीआईसी के निदेशक डॉ. संजीव रॉय ने वर्चुअल माध्यम से अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता पर जोर
कार्यक्रम में डीडीयू-जीकेवाई के मुख्य संचालन अधिकारी डॉ. प्रभाकर सी. बेबनी की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास, रोजगार सृजन और पलायन रोकने के लिए जिला स्तर पर प्रभावी रणनीतियों की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने उत्तराखंड में नाबार्ड द्वारा संचालित विभिन्न पहलों की सराहना करते हुए कहा कि कौशल विकास प्रशिक्षण, सूक्ष्म उद्यम विकास कार्यक्रम, आजीविका उद्यम विकास कार्यक्रम और विपणन सहायता जैसी योजनाएं ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर हुई चर्चा
बैठक के दौरान विशेषज्ञों ने विभिन्न विभागों और संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सभी संबंधित विभाग समन्वित तरीके से कार्य करें तो उद्यमिता को बढ़ावा देने, ग्रामीण पलायन को कम करने, सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक एकीकृत सेवाएं पहुंचाने में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। विशेषज्ञों ने सतत विकास को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए विभिन्न योजनाओं के अभिसरण पर भी जोर दिया।
कौशल अंतराल कम कर ग्रामीण समृद्धि बढ़ाने का संकल्प
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। इससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि पलायन की समस्या में भी कमी आएगी।
नाबार्ड ने इस अवसर पर दोहराया कि वह ग्रामीण युवाओं को कौशल विकास, प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुख कार्यक्रमों के माध्यम से सशक्त बनाने के लिए लगातार कार्य करता रहेगा। संस्था का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी रोजगार के अवसर बढ़ाना, आर्थिक समृद्धि को प्रोत्साहित करना और संतुलित विकास सुनिश्चित करना है।


