उत्तराखंड के लिए 9 जुलाई, 2026 का दिन ऐतिहासिक बन गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और 'उल्लास' कार्यक्रम के तहत, राज्य आज भारत का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है।
आज यानी 9 जुलाई, 2026 को उत्तराखंड ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उत्तराखंड अब भारत का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है। यह सफलता राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और 'उल्लास' (अंडरस्टैंडिंग लाइफ़लॉन्ग लर्निंग फ़ॉर ऑल इन सोसाइटी) कार्यक्रम की बदौलत मिली है। इस कामयाबी के साथ ही उत्तराखंड अब उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है, जिन्होंने 100% साक्षरता का लक्ष्य हासिल कर लिया है।
राज्य ने यह दर्जा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा तय किए गए वयस्क साक्षरता के मानकों को पूरा करने के बाद हासिल किया है। 'उल्लास' कार्यक्रम, जिसे नव भारत साक्षरता कार्यक्रम भी कहा जाता है, केंद्र सरकार की एक योजना है। इसका मकसद 15 साल और उससे ज़्यादा उम्र के उन लोगों को पढ़ाना-लिखाना है, जो औपचारिक स्कूली शिक्षा से वंचित रह गए थे।
कैसे पूरे किए साक्षरता के मानक
उत्तराखंड की पूर्ण साक्षरता की यह यात्रा आज पूरी हुई। राज्य में साक्षरता दर अब 98 प्रतिशत से ज़्यादा है। 'उल्लास' कार्यक्रम के तहत, किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश को तब पूर्ण साक्षर माना जाता है, जब वहां कम से कम 95 प्रतिशत आबादी साक्षर हो। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) गुरमीत सिंह ने इस प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी, जिसके बाद राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित किया गया।
उत्तराखंड से पहले, पांच और राज्य यह दर्जा हासिल कर चुके हैं: मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम। राज्य कैबिनेट ने 19 जून को ही उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी।
'विकसित भारत' की दिशा में एक सामूहिक प्रयास
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे राज्य के लिए एक "मील का पत्थर" बताया है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय लोगों की सक्रिय भागीदारी और सरकार के लगातार प्रयासों को दिया। मुख्यमंत्री ने राज्य के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे सामूहिक प्रयासों से 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।
राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस उपलब्धि को उत्तराखंड के हर निवासी के लिए गर्व का क्षण बताया। 'उल्लास' कार्यक्रम 15 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों को बुनियादी साक्षरता, अंक ज्ञान (numeracy), और डिजिटल व वित्तीय साक्षरता जैसे ज़रूरी जीवन कौशल सिखाने पर ध्यान केंद्रित करता है।


