14 अगस्त को उत्तराखण्ड में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाएगा। देहरादून में मुख्यमंत्री धामी की उपस्थिति में राज्य स्तरीय कार्यक्रम होगा।

भारत सरकार के निर्देशानुसार 14 अगस्त 2026 को पूरे देश में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाएगा। इस दिवस का उद्देश्य भारत विभाजन की त्रासदी, उससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों और लाखों लोगों के संघर्ष व बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। इस अवसर पर उत्तराखण्ड सहित देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सरकार का प्रयास है कि विभाजन के दौरान विस्थापन, हिंसा और असंख्य परिवारों द्वारा झेली गई पीड़ा को केवल इतिहास की किताबों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि समाज उसे समझे और उससे सीख भी ले।

देहरादून में मुख्यमंत्री धामी की मौजूदगी में होगा राज्य स्तरीय कार्यक्रम

महानिदेशक सूचना श्री बंशीधर तिवारी ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में देहरादून में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में उन परिवारों को भी आमंत्रित किया जाएगा जो भारत विभाजन से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान विभाजन के समय जान गंवाने वाले सभी लोगों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखा जाएगा। इसके माध्यम से उन लाखों लोगों को श्रद्धांजलि दी जाएगी जिन्होंने विभाजन की भयावह परिस्थितियों का सामना किया था।

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मतुआ समुदाय पर बने वृत्तचित्र की होगी विशेष स्क्रीनिंग

राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मतुआ समुदाय के इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और समाज के प्रति उनके योगदान पर आधारित एक लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन भी किया जाएगा। इसके अलावा विभाजन विभीषिका से जुड़े घटनाक्रम, ऐतिहासिक दस्तावेजों और तस्वीरों को प्रदर्शित करने के लिए विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा, जिससे लोगों को उस दौर की वास्तविक परिस्थितियों को समझने का अवसर मिल सके।

Digital Exhibition: सभी जिलों में दिखाई जाएगी विभाजन की कहानी

राज्य के सभी जनपदों में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा तैयार की गई डिजिटल प्रदर्शनी प्रदर्शित की जाएगी। इस प्रदर्शनी में विभाजन से प्रभावित परिवारों की पीड़ा, संघर्ष और पुनर्वास की कहानियों को प्रस्तुत किया जाएगा। यह डिजिटल प्रदर्शनी भारत सरकार के पोर्टल से डाउनलोड कर विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शित की जाएगी ताकि अधिक से अधिक लोग इसे देख सकें और इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय से परिचित हो सकें।

स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में होंगे विशेष कार्यक्रम

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में वाद-विवाद प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता, क्विज, व्याख्यान, परिचर्चा और जागरूकता कार्यक्रम शामिल होंगे। छात्रों को भारत विभाजन के इतिहास, उसके सामाजिक प्रभाव और उससे जुड़े मानवीय पक्षों के बारे में जानकारी दी जाएगी। साथ ही छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

विभाजन पीड़ित परिवार साझा करेंगे अपने अनुभव

संस्कृति सचिव श्री युगल किशोर पन्त द्वारा सभी विभागाध्यक्षों, आयुक्तों और जिलाधिकारियों को कार्यक्रमों के आयोजन के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रमों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों और अन्य गणमान्य नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। विभाजन से प्रभावित परिवारों और उनके परिजनों को अपने अनुभव, संघर्ष और स्मृतियां साझा करने का अवसर भी दिया जाएगा।

कैंडल मार्च और श्रद्धांजलि कार्यक्रम भी होंगे आयोजित

विभाजन की त्रासदी में प्रभावित लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए विभिन्न स्थानों पर कैंडल मार्च और स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही विभाजन पीड़ित परिवारों को सम्मानित कर उन्हें स्मृति चिह्न भी प्रदान किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि ऐसे आयोजन न केवल इतिहास को जीवित रखने का कार्य करते हैं, बल्कि समाज को एकता, सद्भाव और राष्ट्रीय एकजुटता का संदेश भी देते हैं।

नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने की पहल

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का मूल उद्देश्य युवा पीढ़ी को यह बताना है कि आजादी के साथ देश ने किस तरह की कठिन परिस्थितियों का सामना किया था। लाखों लोगों का विस्थापन, परिवारों का बिछड़ना और सामाजिक तनाव इतिहास का ऐसा अध्याय है जिसे भुलाया नहीं जा सकता। इसी सोच के साथ 14 अगस्त को पूरे उत्तराखण्ड में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से विभाजन पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी और उनके संघर्ष को याद किया जाएगा।