Google Warns Shadow AI : Google ने आखिर ऐसी क्या चेतावनी दी है, जिसने बढ़ाई टेंशन? क्या गूगल के इस अलर्ट से आम आदमी पर भी असर पड़ेगा? AI की दुनिया में आया नया ‘इनविजिबल खतरा’ क्या है? कहीं आपकी कंपनी में भी तो नहीं घुस चुका ‘Shadow AI’? AI एजेंट्स कैसे बन सकते हैं सबसे बड़ा खतरा? 

AI Cyber Attack : गूगल डीपमाइंड के सीनियर डायरेक्टर मनीष गुप्ता ने आज कहा कि तेजी से विकसित हो रहे AI के इस दौर में, हैकर्स से भी बड़ा साइबर सुरक्षा खतरा 'शैडो AI' और कंपनियों के अंदर काम कर रहे अनऑथराइज्ड AI एजेंट्स बन गए हैं। इसकी वजह से साइबर हमले पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ और शातिर हो गए हैं। दिल्ली में हुए 'गूगल लीडर्स कनेक्ट' इवेंट में गुप्ता ने कहा, "आज सबसे बड़ा खतरा सिर्फ हैकर्स नहीं हैं, बल्कि 'शैडो AI' है. ये ऐसे अनऑथराइज्ड बॉट्स और एजेंट्स हैं जो आपकी कंपनी के अंदर तो काम कर रहे हैं, लेकिन आपके कंट्रोल से बाहर हैं।"

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AI-पावर्ड सिस्टम के आने से बढ़ रहे साइबर अटैक

गुप्ता ने बताया कि AI-पावर्ड सिस्टम के आने से साइबर हमलों की स्पीड बहुत तेज़ी से बढ़ी है, जिससे पारंपरिक सुरक्षा उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा, "किसी सिस्टम की कमजोरी का फायदा उठाने का औसत समय अब घटकर माइनस सात दिन हो गया है। इसका मतलब है कि कोई पैच (सुरक्षा अपडेट) जारी होने से पहले ही सिस्टम पर हमला हो रहा है और किसी सिस्टम में शुरुआती घुसपैठ से लेकर दूसरे बड़े हमले तक का समय अब आठ घंटे से घटकर सिर्फ 22 सेकंड रह गया है।

AI से होने वाले खतरों से कैसे निपटें

  • गुप्ता के मुताबिक, AI से होने वाले खतरों से असरदार तरीके से निपटने के लिए अब साइबर सुरक्षा सिस्टम को "मशीन की स्पीड" पर काम करना होगा. उन्होंने बताया कि गूगल के AI-आधारित सिक्योरिटी एजेंट्स जांच के समय को काफी कम कर रहे हैं।
  • उन्होंने कहा, "हमारे ट्राइएज एजेंट्स 30 मिनट की जांच को सिर्फ 60 सेकंड में निपटा रहे हैं." उन्होंने यह भी जोड़ा कि AI से चलने वाले थ्रेट-हंटिंग सिस्टम इतने बड़े पैमाने पर खतरों की पहचान कर सकते हैं, जितना कोई भी इंसानी टीम नहीं कर सकती।
  • गुप्ता ने बताया कि गूगल ने कंपनियों के लिए खतरों का पता लगाने और उनसे निपटने की क्षमता को मजबूत करने के लिए अपने AI इकोसिस्टम में सिक्योरिटी इंटेलिजेंस और डार्क वेब इंटेलिजेंस को जोड़ा है।

आने वाल सयम में क्या है गूगल का विजन

  • साइबर सुरक्षा के अलावा, गुप्ता ने गूगल के एक बड़े विजन के बारे में भी बताया, जिसे उन्होंने "एजेंटिक एंटरप्राइज" कहा, इसमें ऑटोनॉमस AI एजेंट्स कंपनियों के कामकाज और कस्टमर एंगेजमेंट में मदद करेंगे। इसी कोशिश के तहत, गुप्ता ने "नॉलेज कैटलॉग" को पेश करने की घोषणा की। यह एक यूनिवर्सल कॉन्टेक्स्ट इंजन है जिसका मकसद कंपनियों के स्ट्रक्चर्ड और अनस्ट्रक्चर्ड डेटा को एक साथ लाना है।
  • उन्होंने कहा कि क्लाउड स्टोरेज पर अपलोड की गई फाइलें अब जेमिनी-पावर्ड क्षमताओं का उपयोग करके ऑटोमैटिक रूप से टैग, एनरिच और "एजेंट-रेडी" हो सकती हैं, जिससे मैनुअल डेटा इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम हो जाएगी। गुप्ता ने एक जेमिनी-पावर्ड "डेटा एजेंट किट" का भी अनावरण किया, जिसे डेवलपर्स के मौजूदा कोडिंग एनवायरनमेंट और वर्कफ़्लो में सीधे AI स्किल्स और प्लगइन्स को इंटीग्रेट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर

  • नगुप्ता ने कहा कि अपाचे स्पार्क के लिए गूगल का नया "लाइटनिंग इंजन" AI-युग के वर्कलोड के लिए पिछले मार्केट लीडर की तुलना में दो गुना बेहतर प्राइस-परफॉर्मेंस देता
  • उन्होंने एक "क्रॉस-क्लाउड लेकहाउस" आर्किटेक्चर की भी घोषणा की, जो कंपनियों के डेटा को बड़े पैमाने पर मूव किए बिना कई क्लाउड एनवायरनमेंट में एनालिटिक्स की सुविधा देता है।
  • बहुभाषी AI वॉयस क्षमताओं में हुई प्रगति पर प्रकाश डालते हुए, गुप्ता ने कहा कि जेमिनी के वॉयस मॉडल अब हरियाणवी और भोजपुरी सहित कई भारतीय भाषाओं और बोलियों को सपोर्ट करते हैं।
  • गुप्ता ने कहा, "हरियाणा में बोली जाने वाली हिंदी, उत्तर प्रदेश या बिहार में बोली जाने वाली हिंदी से अलग है." उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय भाषाओं और बोलियों के लिए AI वॉयस क्षमताओं को बेहतर बनाने में गूगल की भारतीय टीमों ने एक बड़ी भूमिका निभाई है. (ANI)