जापान में लाखों यूजर्स का पर्सनल डेटा लीक हो गया है, जिसके बाद पूरे देश में साइबर सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया गया है। बड़ी कंपनियों पर बढ़ते साइबर हमलों को देखते हुए सरकार ने लोगों से पासवर्ड बदलने और सुरक्षा कड़ी करने की अपील की है।
जापान में लाखों यूजर्स का पर्सनल डेटा लीक होने के बाद पूरे देश में साइबर सिक्योरिटी अलर्ट जारी कर दिया गया है। सरकार ने यह कदम बड़ी कंपनियों को निशाना बनाकर किए जा रहे साइबर हमलों के बढ़ने के बाद उठाया है। लॉसन (Lawson) जैसी कन्वीनियंस स्टोर चेन, दाईवा सिक्योरिटीज (Daiwa Securities) और पुराना सामान बेचने वाली कंपनी बुकऑफ (Bookoff) ने डेटा लीक की शिकायत की है। वहीं, कार-शेयरिंग सर्विस 'टाइम्स कार' (Times Car) पर हुए हमले में करीब 66 लाख ग्राहकों के अकाउंट की जानकारी लीक होने की खबर है।
साइबर हमलों में तेजी
जापान सरकार ने कंपनियों और आम लोगों से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने को कहा है, क्योंकि साइबर हमले अब पहले से ज्यादा खतरनाक और जटिल हो गए हैं। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन मंत्री तोशिहिरो फुरुकावा (Toshihiro Furukawa) ने बताया कि हमलों की संख्या और तरीके दोनों में इजाफा हुआ है, जिसका सीधा असर लोगों की जिंदगी और कंपनियों के कामकाज पर पड़ रहा है। सरकार साइबर हमलों से निपटने के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल साइबर सिक्योरिटी ऑफिस ने सरकारी मंत्रालयों को निर्देश दिया है कि वे स्थानीय प्रशासन और प्राइवेट कंपनियों को अलर्ट करें।
इस साल 500 से ज्यादा साइबर हमले
योमिउरी (Yomiuri) अखबार और टोक्यो की साइबर सिक्योरिटी फर्म ट्रेंड माइक्रो (Trend Micro) की एक स्टडी के मुताबिक, जापान में इस साल अब तक 500 से ज्यादा साइबर हमले दर्ज किए जा चुके हैं। पिछले साल 473 और 2024 में 503 मामले सामने आए थे। जानकारों का मानना है कि इस साल यह आंकड़ा नया रिकॉर्ड बना सकता है। रॉयटर्स के एक अन्य आंकड़े के अनुसार, इस साल के शुरुआती नौ महीनों में ही पिछले पूरे साल से ज्यादा साइबर हमले हुए हैं। सिर्फ सितंबर में 86 मामले दर्ज किए गए, जो अगस्त के मुकाबले 18% और जुलाई के मुकाबले 37% ज्यादा है।
पर्सनल डेटा लीक होने के गंभीर नतीजे
इन हमलों में लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस, कॉन्टैक्ट डिटेल्स और दूसरी निजी जानकारियां लीक हुई हैं। सरकार ने चेतावनी दी है कि इस डेटा का गलत इस्तेमाल पहचान चुराने (आइडेंटिटी थेफ्ट), फर्जी ट्रांजैक्शन और आर्थिक धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है। मंत्री फुरुकावा ने साफ किया कि एक बार डेटा लीक होने के बाद इसके नतीजे काफी गंभीर हो सकते हैं।
पासवर्ड को लेकर रहें सावधान
सरकार ने सलाह दी है कि अलग-अलग अकाउंट्स के लिए एक ही पासवर्ड का इस्तेमाल न करें। जहां भी मुमकिन हो, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) चालू करें। इसके अलावा, सरकारी एजेंसियों या जानी-मानी कंपनियों के नाम से आने वाले संदिग्ध ईमेल और मैसेज से भी सावधान रहने को कहा गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, साइबर हमलों के बढ़ने की एक बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल भी है। हैकर्स AI की मदद से सॉफ्टवेयर की कमियां ढूंढ रहे हैं और फर्जी मैसेज तैयार कर रहे हैं।
दक्षिण कोरिया में भी साइबर खतरा
साइबर हमलों का यह खतरा सिर्फ जापान तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण कोरिया में भी इसे लेकर चिंता बढ़ गई है। वहां 9 बैंक और 2 बड़े चर्च इस बात की जांच कर रहे हैं कि कहीं उन पर AI टूल्स के जरिए हमला तो नहीं हुआ। इस साल की पहली छमाही में दक्षिण कोरिया में 1,236 साइबर सुरक्षा से जुड़े मामले सामने आए हैं, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 20% ज्यादा है। एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि अपराधी AI का इस्तेमाल करके हमलों को ऑटोमेट कर रहे हैं, जिससे इन्हें पकड़ना और भी मुश्किल हो गया है।
